नई दिल्ली/शिमला, 14 फरवरी 2026: सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) और शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) के चुनावों पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को बड़ी राहत दी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने शुक्रवार (13 फरवरी) को राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर सुनवाई करते हुए हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के 30 अप्रैल की डेडलाइन को बढ़ाकर 31 मई 2026 तक कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तारीख से आगे कोई विस्तार नहीं दिया जाएगा और चुनाव प्रक्रिया मॉनसून से पहले पूरी होनी चाहिए।
खंडपीठ ने राज्य सरकार की उन दलीलों को खारिज कर दिया, जिसमें परिसीमन (डिलिमिटेशन) के अधूरे काम का हवाला देकर चुनाव टालने की मांग की गई थी। अदालत ने कहा, “परिसीमन या पुनर्सीमांकन का काम चुनाव टालने का कोई वैध आधार नहीं हो सकता। संवैधानिक संस्थाओं के चुनाव में देरी बर्दाश्त नहीं की जा सकती।” हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए बेंच ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया की समयबद्धता पर जोर दिया।
हालांकि, अदालत ने सरकार को कुछ राहत देते हुए आरक्षण रोस्टर, पुनर्निर्माण कार्य और परिसीमन जैसे सभी तैयारी कार्यों की समयसीमा को 28 फरवरी से बढ़ाकर 31 मार्च 2026 कर दी है। इस तारीख तक राज्य निर्वाचन आयोग (एसईसी), पंचायती राज विभाग और संबंधित विभागों को सभी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी, उसके बाद आठ सप्ताह के भीतर चुनाव संपन्न कराने होंगे—यानी 31 मई तक।
बता दें कि हिमाचल प्रदेश में पंचायतों का कार्यकाल 31 जनवरी 2026 को समाप्त हो चुका था। हाईकोर्ट ने 9 जनवरी को सरकार की छह महीने की स्थगन की मांग खारिज करते हुए 30 अप्रैल तक चुनाव कराने का आदेश दिया था। सुक्खू सरकार ने इसे चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जहां अब समयसीमा में एक महीने का विस्तार मिल गया है।
यह फैसला राज्य में करीब 3,500 ग्राम पंचायतों, 90 पंचायत समितियों, 11 जिला परिषदों और 71 शहरी निकायों के चुनावों को प्रभावित करेगा। अदालत ने मॉनसून और पहाड़ी इलाकों में पहुंच की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए यह समयसीमा तय की है।






