शिमला, 12 फरवरी 2026: आज देशभर में केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों के आह्वान पर भारत बंद का आयोजन किया गया है। हिमाचल प्रदेश में भी इस बंद का खासा असर देखने को मिल रहा है, जहां विभिन्न ट्रेड यूनियनों ने केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किए।
सीटू (Centre of Indian Trade Unions) के बैनर तले शिमला सहित प्रदेश के कई जिलों में हजारों मजदूर, कर्मचारी और किसान जमा हुए। प्रदर्शनकारियों ने चार नए श्रम कानूनों (Labour Codes), सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) की निजीकरण, बिजली संशोधन विधेयक-2025, और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते जैसे मुद्दों पर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
हिमाचल में बंद के दौरान विशेष रूप से बिजली विभाग के 15 हजार से अधिक इंजीनियर, कर्मचारी, मजदूर और आउटसोर्स वर्कर्स ने हड़ताल पर रहकर पेन-टूल डाउन किया। शिमला में सीटू के नेतृत्व में सैकड़ों लोग सड़कों पर उतरे और केंद्र सरकार की “मजदूर विरोधी नीतियों” का विरोध जताया। प्रदेश के 12 जिलों में 50 से अधिक स्थानों पर प्रदर्शन हुए।
सीटू हिमाचल प्रदेश के अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने कहा, “यह हड़ताल 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों (जिनमें CITU, INTUC, AITUC आदि शामिल हैं) के संयुक्त आह्वान पर की गई है। हम मजदूरों के अधिकारों की रक्षा, पुरानी पेंशन योजना बहाली, न्यूनतम मजदूरी लागू करने और कॉरपोरेट समर्थक नीतियों के खिलाफ लड़ रहे हैं।”
प्रदेश भर में परिवहन सेवाओं, औद्योगिक क्षेत्रों (जैसे बद्दी, सोलन) और कुछ सरकारी कार्यालयों पर आंशिक असर देखा गया। हालांकि, आवश्यक सेवाएं जैसे अस्पताल और फार्मेसी प्रभावित नहीं हुईं।
यह बंद मुख्य रूप से नए श्रम कानूनों, किसानों पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों (जैसे आयात ड्यूटी में कमी से सेब उत्पादकों को नुकसान) और अन्य आर्थिक नीतियों के विरोध में बुलाया गया है। हिमाचल के सेब किसानों ने भी दिल्ली मार्च की योजना बनाई है।






