नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्षी दलों ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंप दिया है। यह कदम बजट सत्र के दौरान सदन में जारी गतिरोध के बीच उठाया गया है। विपक्ष का मुख्य आरोप है कि स्पीकर ने पक्षपातपूर्ण तरीके से काम किया, खासकर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान बोलने से रोका गया।
प्रस्ताव की मुख्य बातें
- विपक्ष ने लोकसभा सेक्रेटरी जनरल को यह नोटिस नियम 94C के तहत दिया।
- नोटिस पर करीब 118-120 विपक्षी सांसदों के हस्ताक्षर हैं, जिसमें कांग्रेस, DMK, समाजवादी पार्टी जैसे दल शामिल हैं।
- आरोप: स्पीकर ने राहुल गांधी को पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब का हवाला देकर 2020 के भारत-चीन गतिरोध पर चर्चा करने से रोका, साथ ही अन्य विपक्षी नेताओं को बोलने का मौका नहीं दिया।
- विपक्ष ने स्पीकर पर एकतरफा सदन संचालन, कांग्रेस सांसदों पर झूठे आरोप लगाने और कई विपक्षी सांसदों को सस्पेंड करने का भी आरोप लगाया।
राहुल गांधी ने साइन क्यों नहीं किया?
राहुल गांधी ने इस अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए। कांग्रेस ने इसकी वजह स्पष्ट की है:
कांग्रेस सूत्रों और नेताओं के अनुसार, संसदीय लोकतंत्र की गरिमा और परंपराओं के मद्देनजर विपक्ष के नेता (Leader of Opposition) के लिए स्पीकर के खिलाफ ऐसे प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करना उचित नहीं है। यह विपक्षी नेता की मर्यादा और संसदीय प्रक्रिया की गरिमा से जुड़ा मामला है।
क्या होगा आगे?
- नोटिस मिलने के बाद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही का संचालन नहीं किया।
- स्पीकर को हटाने के लिए प्रस्ताव को लोकसभा में बहुमत से पास होना जरूरी है, लेकिन इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ (पहले तीन बार ऐसे नोटिस आए, लेकिन कोई स्पीकर हटा नहीं)।






