बेंगलुरु में बिटकॉइन स्कैम का एक नया और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक 50 वर्षीय निजी कंपनी के कर्मचारी ने महज एक “गलत मैसेज” पर चैटिंग जारी रखने के कारण 70 लाख रुपये गंवा दिए।
घटना कैसे शुरू हुई?
नवंबर 2025 के अंत में (30 नवंबर को) पीड़ित को टेलीग्राम पर एक मैसेज आया। मैसेज भेजने वाली महिला ने खुद को प्रिया अग्रवाल बताया और कहा कि वह किसी राहुल को मैसेज कर रही थी, लेकिन गलती से आपको मैसेज हो गया। उसने “सॉरी” कहकर इग्नोर करने की सलाह दी। लेकिन पीड़ित ने जवाब दिया और बातचीत शुरू हो गई।
धीरे-धीरे चैटिंग व्हाट्सएप पर शिफ्ट हो गई। महिला ने बताया कि वह यूके (लिवरपूल) में रहती है, एक +44 नंबर से बात कर रही है और परिवार का बिजनेस संभालती है। लंबी बातचीत के दौरान उसने पीड़ित का भरोसा जीता।
स्कैम का जाल कैसे बिछाया गया?
महिला ने बिटकॉइन ट्रेडिंग की चर्चा शुरू की और दावा किया कि वह पिछले 4-5 सालों से इससे मोटा मुनाफा कमा रही है। उसने पीड़ित को इंस्टेंट प्रॉफिट का लालच दिया और एक लिंक शेयर किया।
- लिंक पर क्लिक करने पर एक फेक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म खुला, जहां पीड़ित ने अकाउंट बनाया।
- 9 दिसंबर 2025 को पहला निवेश 50 हजार रुपये का किया।
- डैशबोर्ड पर प्रॉफिट दिखने लगा (कुल 2.6 करोड़ रुपये का फेक प्रॉफिट दिखाया गया)।
- लालच में आकर पीड़ित ने 14 जनवरी 2026 तक 8 अलग-अलग ट्रांसफर किए और कुल 70 लाख रुपये विभिन्न बैंक खातों में भेज दिए। इसमें बैंक से लिया गया लोन भी शामिल था।
ठगी का पता कैसे चला?
जब पीड़ित ने प्रॉफिट निकालने की कोशिश की, तो अकाउंट फ्रीज कर दिया गया। कस्टमर केयर ने और पैसे मांगे (अनलॉक फीस के नाम पर)। तब जाकर पीड़ित को समझ आया कि यह साइबर ठगी है।
उसने नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस जांच कर रही है, लेकिन अभी तक कोई बड़ी गिरफ्तारी की खबर नहीं है।
सबक: ऑनलाइन स्कैम से कैसे बचें?
- अनजान नंबर/मैसेज से आए “गलत मैसेज” पर जवाब न दें।
- क्रिप्टो/ट्रेडिंग में तुरंत निवेश न करें, खासकर अगर कोई अनजान व्यक्ति लालच दे।
- फेक प्रॉफिट डैशबोर्ड पर भरोसा न करें।
- निवेश से पहले SEBI-रेगुलेटेड प्लेटफॉर्म चेक करें।
- संदिग्ध लगे तो तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन (1930) या पोर्टल पर रिपोर्ट करें।






