Explore

Search

February 9, 2026 8:58 pm

इको-फ्रेंडली जीवनशैली का जीवंत पाठ: एनएसएस के 70 स्वयंसेवकों ने जिम्मी मगिलिगन सेंटर में लिया पर्यावरण संरक्षण का संकल्प

WhatsApp
Facebook
Twitter
Email

इंदौर। शासकीय नवीन विधि महाविद्यालय, इंदौर के राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के 70 स्वयंसेवकों ने अपने शिक्षकों, कार्यक्रम अधिकारी डॉ. चेतन सराठे, प्रो. संगीता डुडबे, प्रो. पूजा सोलंकी, प्रबंधन समिति के सदस्यों एवं श्री हर्ष नगर के साथ सनावदिया स्थित जिम्मी मगिलिगन सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट का शैक्षणिक भ्रमण किया।

सेंटर की संस्थापिका पद्मश्री डॉ. जनक पलटा मगिलिगन ने स्वयंसेवकों का आत्मीय स्वागत करते हुए उन्हें अपने पति स्वर्गीय श्री जिम्मी मगिलिगन द्वारा प्राकृतिक संसाधनों से निर्मित पूर्णतः इको-फ्रेंडली आवासीय भवन “गिरिदर्शन” का अवलोकन कराया। आधा एकड़ भूमि पर निर्मित यह परिसर सस्टेनेबल जीवनशैली का जीवंत उदाहरण है, जहाँ जैवविविधता से परिपूर्ण वातावरण, फल-फूलों से लदे वृक्ष, रसायनमुक्त फसलें, औषधीय पौधे, स्वच्छ हवा, मिट्टी और जल संरक्षण के उत्कृष्ट प्रयोग देखने को मिले।

भ्रमण के दौरान जनक दीदी ने बताया कि वर्ष 1985 में चंडीगढ़ छोड़कर वे इंदौर आईं और अपने पति के सहयोग से 6 एकड़ बंजर भूमि पर आदिवासी बालिकाओं के सशक्तिकरण हेतु बरली संस्थान की स्थापना की। वर्षों के निरंतर परिश्रम, संकल्प और दूरदृष्टि से उन्होंने इस भूमि को हरित, आत्मनिर्भर और पर्यावरण-संरक्षक मॉडल में परिवर्तित किया। 26 वर्षों की सेवा के बाद सेवानिवृत्त होकर सनावदिया में स्थापित यह आधा एकड़ परिसर आज सस्टेनेबल जीवन का आदर्श बन चुका है।

उन्होंने सौर ऊर्जा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि परिसर में स्थापित सोलर हाइब्रिड पावर प्लांट से 19 सोलर स्ट्रीट लाइटें संचालित हो रही हैं तथा लगभग 50 आदिवासी परिवारों को विद्युत सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही उन्होंने बताया कि वे वर्ष 1988 से जर्मनी निर्मित पैराबोलिक सौर कुकर का उपयोग कर रही हैं, जिससे बिना बिजली और बिना प्रदूषण के भोजन तैयार किया जाता है।

जनक दीदी ने स्वयंसेवकों को जैविक खेती, जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग और औषधीय पौधों के महत्व की व्यावहारिक जानकारी दी। उन्होंने रसायनमुक्त जीवनशैली अपनाने और दैनिक जीवन में छोटे-छोटे सकारात्मक बदलाव लाकर पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने का आह्वान किया।

अपने प्रेरक उद्बोधन में उन्होंने कहा कि सच्ची देशभक्ति केवल शब्दों में नहीं, बल्कि कर्मों में दिखाई देती है। उनके विचारों से प्रेरित होकर स्वयंसेवकों ने अपने दैनिक जीवन में पर्यावरण-संरक्षण और सस्टेनेबल जीवनशैली अपनाने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम के अंत में एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी ने जनक दीदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना के छठवें दिवस पर आयोजित यह शैक्षणिक भ्रमण स्वयंसेवकों के लिए अत्यंत प्रेरणादायी, ज्ञानवर्धक एवं व्यवहारिक अनुभव रहा।

Sanjeevni Today
Author: Sanjeevni Today

ताजा खबरों के लिए एक क्लिक पर ज्वाइन करे व्हाट्सएप ग्रुप

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement
लाइव क्रिकेट स्कोर