भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने चंद्रयान-4 मिशन के लिए चंद्रमा पर एक सुरक्षित लैंडिंग साइट की पहचान कर ली है। यह क्षेत्र चंद्रयान-3 के सफल लैंडिंग पॉइंट शिव शक्ति पॉइंट के निकट है, लेकिन इससे भी दक्षिणी ध्रुव की ओर ज्यादा करीब, मॉन्स माउटन (Mons Mouton) क्षेत्र में स्थित है। ISRO के स्पेस एप्लीकेशन्स सेंटर (SAC) के वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-2 ऑर्बिटर की हाई-रेजोल्यूशन इमेजरी (OHRC) का उपयोग करके इस क्षेत्र का विस्तृत अध्ययन किया है।
वैज्ञानिकों ने MM-4 नामक एक 1 वर्ग किलोमीटर के पैच को सबसे सुरक्षित बताया है। इस साइट की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
- औसत ढलान: केवल 5 डिग्री के आसपास, जो लैंडर के लिए आदर्श है (लैंडर 10 डिग्री तक ढलान सहन कर सकता है)।
- खतरा स्तर: मात्र 9.89%, जिसमें बड़े गड्ढे और पत्थर बहुत कम हैं।
- सुरक्षित ग्रिड: 24×24 मीटर के 568 ग्रिड सुरक्षित पाए गए, जो अन्य विकल्पों से कहीं ज्यादा हैं।
- सूर्य प्रकाश: कम से कम 11-12 दिनों तक अच्छी रोशनी मिलेगी, जो सोलर पावर के लिए जरूरी है।
- स्थान: अक्षांश -84.289° और देशांतर 32.808° पर स्थित, जो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के बहुत करीब है और पानी-बर्फ (वॉटर-आइस) के निशान वाली जगहों के पास है।
इस क्षेत्र का चयन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि चंद्रयान-4 भारत का पहला लूनर सैंपल रिटर्न मिशन होगा। इसमें लैंडर चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा, लगभग 2-3 किलोग्राम मिट्टी और चट्टानों के सैंपल इकट्ठा करेगा, फिर एसेंडर मॉड्यूल उन्हें लेकर चंद्रमा की कक्षा में जाएगा और अंत में री-एंट्री मॉड्यूल के जरिए पृथ्वी पर वापस लाएगा।
पांच संभावित साइटों का मूल्यांकन किया गया था, लेकिन एक साइट को स्थायी छाया होने के कारण खारिज कर दिया गया। MM-4 को सबसे बेहतर माना गया है क्योंकि यहां खतरे कम हैं, रोशनी अच्छी है और वैज्ञानिक रूप से मूल्यवान क्षेत्र (जैसे पानी-बर्फ) के करीब है।
ISRO चेयरमैन और अन्य अधिकारियों के अनुसार, मिशन का लक्ष्य 2028 तक लॉन्च करना है। यह मिशन पांच मॉड्यूल्स वाला होगा और दो अलग-अलग LVM-3 रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा। सफल होने पर भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जो चंद्रमा से सैंपल वापस ला सकेंगे।






