डिफेंस डेस्क, नई दिल्ली। भारत और रूस के बीच एयरोस्पेस क्षेत्र में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। जनवरी 2026 में हैदराबाद में आयोजित Wings India 2026 अंतरराष्ट्रीय एयर शो के दौरान हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (UAC) ने SJ-100 (सुखोई सुपरजेट-100) रीजनल जेट के भारत में संयुक्त उत्पादन का महत्वपूर्ण समझौता किया। यह परियोजना भारत को सिविल एविएशन मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
SJ-100 एयरक्राफ्ट क्या है?
SJ-100 एक छोटा-मध्यम दूरी का रीजनल पैसेंजर जेट है, जो 95-103 यात्रियों को ले जाने की क्षमता रखता है। यह ट्विन-इंजन नैरो-बॉडी विमान है, जो छोटे शहरों, क्षेत्रीय हवाई अड्डों और शॉर्ट-हॉल रूट्स (जैसे दिल्ली-लखनऊ, मुंबई-पुणे) के लिए आदर्श है। रेंज लगभग 3,500 किमी तक है।
महत्वपूर्ण बात: रूस-यूक्रेन संघर्ष और पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद SJ-100 को पूरी तरह इम्पोर्ट सब्स्टीट्यूटेड (विदेशी पार्ट्स मुक्त) बनाया गया है। अब इसमें रूसी Aviadvigatel PD-8 इंजन, रूसी एवियोनिक्स, ब्रेक, सॉफ्टवेयर, वायरिंग और इंटीरियर शामिल हैं। यह सैंक्शंस-प्रूफ बन गया है, जिससे भारत जैसे देशों के लिए यह आकर्षक विकल्प है।
भारत-रूस साझेदारी के प्रमुख बिंदु
- अक्टूबर 2025 में प्रारंभिक MoU साइन हुआ था।
- 28 जनवरी 2026 को Wings India एयर शो में फाइनल एग्रीमेंट हुआ, जहां HAL को SJ-100 का लाइसेंस्ड प्रोडक्शन, बिक्री, पार्ट्स मैन्युफैक्चरिंग, मेंटेनेंस और आफ्टर-सेल्स सर्विस का अधिकार मिला।
- UAC HAL को तकनीकी सहायता, डिजाइन कंसल्टिंग, स्पेशलिस्ट भेजने और प्रोडक्शन फैसिलिटी सेटअप में मदद करेगी।
- HAL भारत में विमान का सर्टिफिकेशन (DGCA से) करवाएगा।
- शुरुआत में 10-20 SJ-100 रूस से लीज पर लाए जाएंगे, फिर 3 साल में SKD (सेमी नॉकडाउन किट) से असेंबली शुरू होगी, और बाद में पूर्ण स्थानीय उत्पादन (CKD स्तर) होगा।
- HAL को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर मिलेगा, जिसमें डिजाइन, इंजन और एवियोनिक्स की जानकारी शामिल है।
रणनीतिक अहमियत क्या है?
भारत के लिए:
- मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत को मजबूती: HAL पहली बार बड़े पैमाने पर सिविलियन पैसेंजर जेट बनाएगा। कंपनी का लक्ष्य सिविल एविएशन से 25% रेवेन्यू हासिल करना है।
- UDAN स्कीम के तहत क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ेगी। भारत को अगले दशक में 200+ ऐसे रीजनल जेट की जरूरत है।
- आयात निर्भरता कम होगी, स्थानीय रोजगार बढ़ेगा और HAL को नई क्षमता मिलेगी।
- भविष्य में एशिया-अफ्रीका में निर्यात संभव, जो भारत को एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग हब बनाएगा।
- अन्य साझेदारियों (जैसे Embraer-Adani, Airbus-Tata) के साथ मिलकर उद्योग को बूस्ट।
रूस के लिए:
- बड़े बाजार (भारत) में निर्यात और उत्पादन।
- सैंक्शंस के दौर में नए पार्टनरशिप से राजस्व और टेक्नोलॉजी शेयर।
- 30 साल पुरानी इंडो-रूसी दोस्ती (Su-30MKI जैसे प्रोजेक्ट्स) का विस्तार अब सिविल एविएशन में।






