जयपुर। राजस्थान उच्च न्यायालय ने शहर की सड़कों, फुटपाथों और आम रास्तों पर अवैध रूप से बने मंदिरों को हटाने का बड़ा और सख्त आदेश दिया है। यह फैसला जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान आया, जिसमें याचिकाकर्ता ने जयपुर के प्रतापनगर इलाके में सार्वजनिक रास्ते पर मंदिर बनने और उसके सहारे अवैध दुकानें चलने की शिकायत की थी।
मुख्य बिंदु क्या हैं?
- आदेश किसने दिया? कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश संगीता शर्मा की खंडपीठ ने यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।
- याचिकाकर्ता कौन? जयपुर के निवासी सनी मीणा ने जनहित याचिका दायर की थी। उन्होंने विशेष रूप से प्रतापनगर सेक्टर-7 में आम रास्ते पर बने मंदिर और उसके आसपास चल रही अवैध दुकानों का जिक्र किया।
- कोर्ट ने क्या निर्देश दिए?
- जयपुर शहर के फुटपाथ, सड़क और सार्वजनिक रास्तों पर बने सभी अवैध मंदिरों को तुरंत हटाया जाए।
- मंदिरों में स्थापित मूर्तियों को निकटतम किसी वैध मंदिर में विधिवत रूप से शिफ्ट किया जाए।
- राज्य सरकार को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने होंगे ताकि ऐसे अवैध निर्माणों पर रोक लगे और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
- जयपुर नगर निगम कमिश्नर को अगली सुनवाई पर शपथपत्र (एफिडेविट) दाखिल करना होगा, जिसमें बताया जाए कि उन्होंने अवैध मंदिर हटाने के लिए क्या कदम उठाए।
- कोर्ट ने सात दिनों के अंदर आवश्यक कार्रवाई पूरी करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
- क्यों दिया यह आदेश? कोर्ट ने माना कि सार्वजनिक जगहों पर अवैध अतिक्रमण से आम लोगों को असुविधा होती है, पैदल चलने वालों और वाहन चालकों की सुरक्षा खतरे में पड़ती है। ऐसे अतिक्रमणों के खिलाफ कोई सहानुभूति नहीं दिखाई जा सकती।
क्या प्रभाव पड़ेगा?
यह आदेश जयपुर में कई इलाकों में लागू होगा, जहां फुटपाथ या रोड पर छोटे-बड़े मंदिर बने हुए हैं और उनके आसपास दुकानें या अन्य निर्माण हो गए हैं। नगर निगम और स्थानीय प्रशासन अब 7 दिनों में कार्रवाई शुरू करेगा, जिससे शहर की सड़कें और पैदल मार्ग फिर से आम लोगों के लिए खुलेंगे।
यह फैसला सार्वजनिक जगहों को अवैध कब्जे से मुक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि धार्मिक भावनाओं का सम्मान जरूरी है, लेकिन सार्वजनिक सुरक्षा और सुविधा सर्वोपरि है।






