नई दिल्ली, 28 जनवरी 2026: केंद्रीय बजट 2026-27 की तारीख नजदीक आते ही शेयर बाजार में अनिश्चितता और बेचैनी का माहौल गहरा गया है। निवेशक इस बात से चिंतित हैं कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कैपिटल गेंस टैक्स के ढांचे में एक बार फिर बदलाव कर सकती हैं, खासकर जब बाजार पहले से ही कमजोर दौर से गुजर रहा है।
वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट 1 फरवरी 2026 (रविवार) को सुबह 11 बजे संसद में पेश किया जाएगा। यह निर्मला सीतारमण का नौवां लगातार बजट होगा, जो भारतीय इतिहास में एक रिकॉर्ड है। बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलेगा, जिसमें 31 जनवरी को इकोनॉमिक सर्वे पेश किया जाएगा।
बाजार विशेषज्ञों और निवेशकों की मुख्य चिंता कैपिटल गेंस टैक्स पर केंद्रित है। वर्तमान में इक्विटी शेयरों और इक्विटी म्यूचुअल फंड्स पर:
- लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG): 12 महीने से अधिक होल्डिंग पर ₹1.25 लाख तक की छूट के बाद 12.5% टैक्स।
- शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG): 20% टैक्स।
2024 के बजट में हुए इन बढ़ोतरी के बाद से बाजार में भरोसा कमजोर हुआ है। निवेशक आशंकित हैं कि सरकार राजस्व बढ़ाने के लिए LTCG छूट सीमा को और सीमित कर सकती है या दरों में बदलाव ला सकती है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार स्थिरता बनाए रखने के लिए कोई बड़ा बदलाव नहीं करेगी, क्योंकि इससे बाजार में और गिरावट आ सकती है।
कई ब्रोकरेज और इंडस्ट्री बॉडीज जैसे AMFI ने LTCG छूट को ₹2 लाख तक बढ़ाने की मांग की है, ताकि छोटे निवेशकों को राहत मिले और लंबी अवधि के निवेश को प्रोत्साहन मिले। लेकिन अधिकांश विश्लेषकों का अनुमान है कि बजट में टैक्स ढांचे में स्थिरता बरकरार रहेगी, क्योंकि बाजार पहले से ही FPI बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितताओं से जूझ रहा है।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की लगातार बिकवाली से बाजार में दबाव बना हुआ है। सेंसेक्स और निफ्टी में हाल के दिनों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, और निवेशक बजट से पहले सतर्क रुख अपना रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि बजट में फिस्कल कंसॉलिडेशन, इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस और मिडिल क्लास को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन कैपिटल मार्केट टैक्स में कोई बड़ा झटका नहीं दिया जाएगा। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि बजट तक पोजिशन हल्की रखें और लॉन्ग-टर्म होल्डिंग पर फोकस करें।






