नई दिल्ली, 28 जनवरी 2026: आज बुधवार को सोने की कीमतों ने नया इतिहास रच दिया है। वैश्विक स्तर पर सोने का भाव $5,200 प्रति औंस के पार निकल गया है, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। यह उछाल मुख्य रूप से बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव, व्यापार युद्ध की आशंकाओं, अमेरिकी नीतिगत अनिश्चितता और सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) की मांग के कारण हुआ है।
ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स और अन्य प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के अनुसार, सोने का स्पॉट प्राइस आज $5,232.87 प्रति औंस तक पहुंच गया, जो पिछले दिन से करीब 1% की बढ़ोतरी दर्शाता है। इस साल अब तक सोने में लगभग 20% की तेजी आई है, जबकि पिछले साल के मुकाबले यह 89% से अधिक ऊपर है। फरवरी 2026 डिलीवरी के लिए गोल्ड फ्यूचर्स भी $5,200 के स्तर को पार कर चुके हैं।
कारण क्या हैं?
- जियोपॉलिटिकल और व्यापार तनाव: अमेरिका द्वारा कुछ देशों पर नए टैरिफ लगाने की खबरों और वैश्विक संघर्षों ने निवेशकों को डॉलर और बॉन्ड्स से दूर कर सोने की ओर धकेला है।
- नीतिगत अनिश्चितता: अमेरिकी सरकार शटडाउन की आशंका, फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति और फिस्कल चिंताओं ने सुरक्षित एसेट्स की मांग बढ़ाई है।
- केंद्रीय बैंकों की खरीदारी: कई केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं, जिससे डिमांड मजबूत बनी हुई है। साथ ही ETF में निवेश और प्राइवेट सेक्टर की मांग भी रिकॉर्ड स्तर पर है।
- डॉलर की कमजोरी: अमेरिकी डॉलर में गिरावट ने सोने को और आकर्षक बनाया है।
भारत में सोने के दाम भी वैश्विक तेजी के साथ ऊंचे स्तर पर हैं। हालांकि, घरेलू बाजार में आज मामूली गिरावट देखी गई, जहां दिल्ली में 24 कैरेट सोना 1,62,090 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड कर रहा है। मुंबई में यह 1,61,940 रुपये पर है। चांदी की कीमतें भी तेजी से बढ़ रही हैं, जो 1 किलो पर 3.70 लाख रुपये के पार पहुंच गई हैं।
एक्सपर्ट्स की राय बड़े बैंकों जैसे ड्यूश बैंक, गोल्डमैन सैक्स और सोसाइटी जनरल ने 2026 के अंत तक सोने की कीमत $6,000 प्रति औंस तक पहुंचने का अनुमान जताया है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह रैली जारी रहेगी, क्योंकि निवेशक मुद्रा अवमूल्यन (डेबेसमेंट) और मैक्रो रिस्क्स से बचाव के लिए सोने को पसंद कर रहे हैं।






