नई दिल्ली। वैश्विक व्यापार में भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 2025 में भारत पर लगाए गए भारी टैरिफ के कारण हुए नुकसान की भरपाई से कहीं अधिक लाभ वाली एक मेगा डील अब अंतिम चरण में है।
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) पर 27 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में हस्ताक्षर होने की संभावना है। यह समझौता इतना महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि दोनों पक्षों के नेताओं ने इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ (सभी डीलों की मां) का नाम दिया है। इस एक समझौते से भारत को EU के 27 सदस्य देशों में बिना या बहुत कम शुल्क के सामान निर्यात करने का अवसर मिलेगा, जो भारतीय निर्यातकों के लिए गेम-चेंजर साबित होगा।
अमेरिकी टैरिफ से हुआ नुकसान
पिछले साल अप्रैल और अगस्त 2025 में ट्रंप प्रशासन ने भारत पर पहले 25% का ‘रेसिप्रोकल’ टैरिफ लगाया, फिर रूसी तेल खरीद को लेकर अतिरिक्त 25% पेनल्टी टैरिफ थोप दिया। इससे कुल टैरिफ 50% तक पहुंच गया। भारतीय निर्यात क्षेत्र, खासकर टेक्सटाइल, फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य क्षेत्रों को अनुमानित 6 अरब डॉलर का सीधा नुकसान हुआ। यह टैरिफ भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में तनाव का प्रमुख कारण बना।
‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ से होगा 10 गुना ज्यादा फायदा
EU के साथ FTA से भारत को होने वाला लाभ अमेरिकी टैरिफ से हुए नुकसान की भरपाई से कई गुना अधिक होगा। विशेषज्ञों के अनुसार:
- भारतीय टेक्सटाइल, फुटवियर, इलेक्ट्रॉनिक्स, केमिकल्स, फार्मास्यूटिकल्स और आईटी सेवाओं के लिए यूरोप में टैरिफ-मुक्त या बहुत कम टैरिफ वाला बाजार खुलेगा।
- EU से आयातित कारों, वाइन, लग्जरी गुड्स आदि पर भारत टैरिफ कम करेगा (जैसे कारों पर 110% से घटाकर 40% तक), लेकिन बदले में भारत के निर्यात को EU में बड़े पैमाने पर बढ़ावा मिलेगा।
- अनुमान है कि इस डील से भारतीय निर्यात में दशकों में सबसे बड़ी उछाल आएगी, जो अमेरिकी नुकसान के मुकाबले कई गुना (कुछ अनुमानों में 10 गुना तक) अधिक राजस्व और रोजगार पैदा करेगी।
- साथ ही, एक रक्षा और सुरक्षा साझेदारी (Defence Pact) और मोबिलिटी फ्रेमवर्क भी हस्ताक्षरित होने की उम्मीद है, जो रणनीतिक संबंधों को मजबूत करेगा।
गणतंत्र दिवस पर EU की मौजूदगी
EU की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन गणतंत्र दिवस 2026 के मुख्य अतिथि के रूप में भारत में मौजूद हैं। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच व्यापार, रक्षा और डिजिटल ट्रेड पर गहन बातचीत हुई। EU ट्रेड कमिश्नर मारोस शेफकोविच ने इसे “मदर ऑफ ऑल डील्स” बताते हुए कहा कि यह समझौता वैश्विक संरक्षणवाद के दौर में मुक्त व्यापार का एक मॉडल बनेगा।
यह डील न केवल अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को न्यूट्रलाइज करेगी, बल्कि भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत स्थिति दिलाएगी। यदि कल (27 जनवरी) हस्ताक्षर हो जाते हैं, तो यह भारत की आर्थिक कूटनीति की एक बड़ी जीत होगी।






