महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर से अनोखा और चौंकाने वाला मोड़ आया है। सोलापुर जिले के बार्शी तालुका में आगामी जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों के लिए एक असामान्य महागठबंधन सामने आया है। यहां भाजपा को चुनौती देने के लिए दोनों शिवसेना गुट (एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे) तथा दोनों एनसीपी गुट (अजित पवार और शरद पवार) ने हाथ मिला लिया है।
गठबंधन की खास बातें:
- यह गठबंधन भाजपा के खिलाफ है, जबकि शिंदे शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी राज्य स्तर पर महायुति (भाजपा के साथ) सरकार में साझेदार हैं।
- स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं की भावनाओं और जीत की संभावनाओं को देखते हुए यह फैसला हुआ है, जो राज्य की राजनीति में ‘कुछ भी असंभव नहीं’ वाली मिसाल पेश करता है।
- बार्शी में यह पहली बार है जब शिवसेना के दोनों गुट फूट के बाद इस तरह एकजुट होकर भाजपा का मुकाबला कर रहे हैं।
उद्धव गुट की प्रतिक्रिया:
शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के बार्शी विधायक दिलीप सोपल ने इस पर खुलकर बात की है। उन्होंने कहा:
“दोनों शिवसेना का एक साथ आना कोई जबरन कराया गया फैसला नहीं है, बल्कि हालात ऐसे बने कि यह अपने आप हो गया। कार्यकर्ताओं की भावनाओं को ध्यान में रखकर यह फैसला लिया गया है। मैंने इसे घडवून आणलं नाही, हे घडून आलं आहे। ‘जो जे वांछील, तो ते लाहो’।”
सोपल ने यह भी संकेत दिया कि यह स्थानीय स्तर का प्रयोग है, जो कार्यकर्ताओं की एकता और भाजपा को रोकने की जरूरत से उपजा है।
यह घटनाक्रम महाराष्ट्र की स्थानीय चुनावी राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है, जहां राज्य स्तर के गठबंधन स्थानीय हितों के आगे कमजोर पड़ जाते हैं। बार्शी का यह महागठबंधन अब पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गया है और आने वाले जिला परिषद चुनावों में इसका असर देखना दिलचस्प होगा।






