सुप्रीम कोर्ट ने अरावली क्षेत्र में अवैध खनन को गंभीर अपराध करार देते हुए राजस्थान सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति (एक्सपर्ट कमिटी) का गठन करेगा, जिसमें वन, पर्यावरण, खनन और संबंधित क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल होंगे। यह समिति कोर्ट की सीधी निगरानी में काम करेगी और अरावली की परिभाषा, खनन गतिविधियों तथा पर्यावरणीय प्रभावों पर समग्र जांच करेगी।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंगलवार (21 जनवरी 2026) को सुनवाई के दौरान कहा कि अवैध खनन से अपूरणीय क्षति होती है, जिसे पलटना लगभग असंभव है। कोर्ट ने राजस्थान में जारी खनन पट्टों और पेड़ों की कटाई पर सख्त टिप्पणी की। CJI ने कहा, “हमारे आदेश बिल्कुल साफ हैं, लेकिन दुर्भाग्य से अवैध खनन और भ्रष्टाचार जारी है। राज्य को अपनी मशीनरी हर हाल में हरकत में लानी होगी।”
मुख्य बिंदु:
- 100 मीटर नियम पर रोक जारी: अरावली पहाड़ियों को 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली पहाड़ियों के रूप में परिभाषित करने वाले पहले आदेश पर रोक बरकरार रखी गई है। कोर्ट ने ‘वन’ और ‘अरावली’ की परिभाषाओं को अलग-अलग रखने पर जोर दिया।
- राजस्थान सरकार का आश्वासन: कोर्ट ने राजस्थान सरकार के आश्वासन को रिकॉर्ड किया कि अरावली क्षेत्र में कोई अवैध खनन नहीं होगा।
- विशेषज्ञ समिति का प्रस्ताव: कोर्ट ने अमिकस क्यूरी के. परमेश्वर, ASG और अन्य पक्षों से चार सप्ताह में पर्यावरणविदों, वैज्ञानिकों और खनन विशेषज्ञों के नाम सुझाने को कहा है। समिति कोर्ट के निर्देशन में काम करेगी।
- अगली सुनवाई: मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी, तब तक केंद्र, राजस्थान और अन्य संबंधित राज्यों को विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।
कोर्ट ने जोर दिया कि यह कोई विरोधात्मक मुकदमा नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और भविष्य की पीढ़ियों के अधिकारों की रक्षा का मुद्दा है। अवैध खनन को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।






