करीब दो हफ्तों पहले भारत सरकार ने FY 2025-26 की दूसरी तिमाही (Q2) के GDP ग्रोथ आंकड़े जारी किए थे, जिसमें 8.2% की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। यह पिछले साल की समान तिमाही के 5.6% से काफी बेहतर है और छह तिमाहियों का उच्चतम स्तर है। पहली छमाही (H1) में कुल ग्रोथ 8% रही, जो अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाती है।
अब बजट पेश होने से महज 10 दिन पहले भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर से दो बड़ी सौगातें मिली हैं। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) और प्रमुख रेटिंग एजेंसी Moody’s ने भारत की आर्थिक तस्वीर को और चमकदार बनाते हुए अपनी पूर्वानुमान में बड़ा उछाल दिया है।
IMF ने जनवरी 2026 के World Economic Outlook अपडेट में भारत के FY 2025-26 (अप्रैल 2025 – मार्च 2026) के GDP ग्रोथ फोरकास्ट को पिछले अनुमान 6.6% से बढ़ाकर 7.3% कर दिया है। यह 0.7 प्रतिशत अंकों का बड़ा सुधार है, जो हाल की मजबूत गति (खासकर Q3 और Q4 में अनुमानित मजबूती) पर आधारित है। IMF ने कहा है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा, हालांकि अगले सालों में ग्रोथ थोड़ी मॉडरेट होकर 6.4% पर आ सकती है।
इसी तरह, अमेरिका की प्रमुख फाइनेंशियल रेटिंग एजेंसी Moody’s Ratings ने भी FY26 (वर्ष मार्च 2026 तक) के लिए भारत की ग्रोथ को 7.3% अनुमानित किया है, जो पिछले साल के 6.5% से काफी ऊपर है। Moody’s का कहना है कि यह मजबूत वृद्धि औसत घरेलू आय बढ़ाएगी और इंश्योरेंस जैसे सेक्टर में मांग को बढ़ावा देगी। डिजिटाइजेशन और अन्य सुधारों से भी फायदा होगा।
भारत दुनिया के प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में इकलौता देश है, जिसकी ग्रोथ रेट लगातार 7% से ऊपर बनी हुई है और आने वाले समय में भी सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बनी रहेगी। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने अपनी जनवरी 2026 की World Economic Outlook अपडेट में भारत के FY 2025-26 (अप्रैल 2025-मार्च 2026) के लिए GDP ग्रोथ फोरकास्ट को 7.3% पर रखा है, जो दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे ऊंचा है।
तुलना देखिए:
- चीन: 5% (2025-26), फिर 4.5% और 4%।
- अमेरिका: करीब 2.1-2.4%।
- वैश्विक औसत: 3.3%।
- अन्य G20 देश: भारत 6.2% (2026 कैलेंडर ईयर) के साथ टॉप पर, जबकि जापान, जर्मनी, इटली जैसे विकसित देश 1% से नीचे।
भारत की यह मजबूत ग्रोथ घरेलू कंजम्पशन (उपभोग) और डिमांड में भारी उछाल से आ रही है। ग्रामीण आय में सुधार, टैक्स कट्स, GST रेशनलाइजेशन, मजबूत सर्विसेज और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर, सरकारी कैपेक्स और डिजिटलाइजेशन ने इंजन को फुल स्पीड पर रखा है। NSO के पहले एडवांस एस्टीमेट्स में FY 2025-26 के लिए 7.4% ग्रोथ दिखाई गई है, जबकि RBI ने भी 7.3% का अनुमान लगाया है।
सबसे कमाल की बात: इतनी हाई ग्रोथ के बावजूद महंगाई काबू में है। दिसंबर 2025 में CPI रिटेल इन्फ्लेशन सिर्फ 1.33% रहा (नवंबर में 0.71% से थोड़ा ऊपर), जो RBI के 4% टारगेट से काफी नीचे है। फूड इन्फ्लेशन नेगेटिव (-2.71%) रहा, जिससे ओवरऑल महंगाई 2% से नीचे बनी हुई है।
फिर भी RBI का पॉलिसी रेट (रेपो रेट) अभी 5.25% पर है (दिसंबर 2025 में 25 bps कट के बाद)। यह “गोल्डीलॉक्स” सिचुएशन है—ग्रोथ हाई, इन्फ्लेशन लो—जिसे RBI गवर्नर ने “रेयर गोल्डीलॉक्स पीरियड” कहा है। कम इन्फ्लेशन की वजह से आगे और रेट कट की गुंजाइश बनी हुई है, लेकिन क्रिसिल जैसी एजेंसियां फरवरी 2026 MPC में रेट होल्ड की उम्मीद जता रही हैं क्योंकि इन्फ्लेशन में हल्की बढ़ोतरी दिख रही है।






