यह खबर जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (Jaipur Literature Festival 2026) के पहले दिन से जुड़ी हुई है, जो 15 जनवरी 2026 को शुरू हुआ। मशहूर गीतकार, लेखक और शायर जावेद अख्तर ने “Points of View” सत्र में लेखिका वरीशा फरासत से बातचीत के दौरान कई महत्वपूर्ण और बेबाक विचार रखे।
आपके द्वारा शेयर की गई बातें बिल्कुल सही हैं और हालिया रिपोर्ट्स से मैच करती हैं:
- धर्मनिरपेक्षता (Secularism) पर उन्होंने कहा कि इसका कोई “क्रैश कोर्स” नहीं होता। अगर कोई सिखाएगा तो वो फेक होगा। यह आपके आसपास के माहौल, परिवार और परिवेश से स्वाभाविक रूप से आता है। उन्होंने अपने बचपन का जिक्र किया कि उन्हें यह सब नाना-नानी से मिला।
- संस्कृत vs उर्दू के सवाल पर एक दर्शक ने पूछा कि कौन सी भाषा पहले आई, तो जावेद अख्तर ने तीखा जवाब दिया: “यह सवाल ही गलत है!” उन्होंने स्पष्ट किया कि संस्कृत हजारों साल पुरानी है, जबकि उर्दू “कल की बच्ची” है (यानी बहुत नई, लगभग 1000 साल से कम पुरानी)। उर्दू को उन्होंने संस्कृत की “छोटी बहन” जैसी बताया, जो इससे प्रभावित होकर विकसित हुई।
- तमिल को उन्होंने दुनिया की सबसे पुरानी जीवित भाषा बताया, और कहा कि उर्दू इस “रेस” में है ही नहीं। भाषाओं की तुलना उम्र से नहीं, बल्कि उनके योगदान, साहित्य और महत्व से होनी चाहिए। भाषा क्षेत्र (region) की होती है, धर्म (religion) की नहीं।
- उन्होंने उर्दू को भारत की साझा विरासत बताया और कहा कि इसे किसी एक समुदाय से जोड़ना गलत है।
यह सत्र JLF 2026 के क्लार्क्स आमेर होटल में हुआ, जहां फेस्टिवल का उद्घाटन राजस्थान के CM भजनलाल शर्मा और डिप्टी CM दीया कुमारी ने किया। जावेद अख्तर ने अपने बचपन, मां की भाषा सिखाने की यादें, और बॉलीवुड के बदलते दौर पर भी बात की, साथ ही युवाओं को पढ़ने और निष्पक्ष रहने की सलाह दी।






