सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में I-PAC (Indian Political Action Committee) के दफ्तर पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी से जुड़े विवाद में बड़ा फैसला सुनाया है।
मुख्य बातें:
- ED ने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य पुलिस ने 8 जनवरी 2026 को कोलकाता के सॉल्ट लेक स्थित I-PAC ऑफिस और इसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर पर चल रही छापेमारी में दखल दिया। ED का दावा है कि सबूत (डिजिटल डिवाइस, दस्तावेज) जब्त करने से रोका गया, कुछ सामग्री को पुलिस के साथ मिलकर ले जाया गया, और जांच को बाधित किया गया। यह मामला कोयला तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है।
- बदले में, पश्चिम बंगाल पुलिस ने ED अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की थी।
- आज (15 जनवरी 2026) जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने ED की याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि राज्य एजेंसियों द्वारा केंद्रीय जांच में हस्तक्षेप बहुत गंभीर मुद्दा है। अगर ऐसे मामलों पर रोक नहीं लगाई गई तो राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है (lawlessness)।
- अहम आदेश:
- ED अधिकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR पर अगली सुनवाई (3 फरवरी 2026) तक रोक लगा दी गई है।
- पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी किया गया है, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, DGP राजीव कुमार, कोलकाता पुलिस कमिश्नर और अन्य को 2 हफ्तों में जवाब दाखिल करने को कहा गया है।
- छापेमारी वाली जगहों के CCTV फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया है।
- ED ने CBI जांच और कुछ पुलिस अधिकारियों के सस्पेंशन की मांग भी की है, जिस पर भी कोर्ट विचार करेगा।
यह फैसला ED को बड़ी राहत देता है और राज्य सरकार के लिए झटका माना जा रहा है। TMC का पक्ष है कि ED राजनीतिक मंशा से TMC की चुनावी रणनीति (I-PAC TMC के लिए काम करता है) चुराने की कोशिश कर रहा था, लेकिन कोर्ट ने जांच में दखल को गंभीरता से लिया।
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