भारतीय शेयर बाजार में 12 जनवरी 2026 (सोमवार) को कारोबार की शुरुआत बेहद कमजोर रही। बाजार खुलते ही सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट देखी गई, जबकि जापान, दक्षिण कोरिया और हांगकांग जैसे अन्य एशियाई बाजारों में तेजी का रुख था। यह गिरावट पिछले सप्ताह की लगातार कमजोरी को और गहरा करती नजर आई, जहां सेंसेक्स करीब 2,185 अंक और निफ्टी 2.5% से अधिक टूट चुका था।
शुरुआती कारोबार में स्थिति
- BSE Sensex: पिछले सत्र के बंद स्तर 83,576.24 से खुला 83,435.31 पर, लेकिन मिनटों में 525+ अंकों की गिरावट के साथ 83,043 के आसपास पहुंच गया।
- NSE Nifty 50: पिछले बंद 25,683.30 से खुला 25,669.05 पर, फिर 150+ अंकों की गिरावट के साथ 25,529 के स्तर तक लुढ़क गया। यह गिरावट मुख्य रूप से वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, खासकर ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों और इससे जुड़े कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से प्रभावित थी। ईरान में आर्थिक संकट और सुप्रीम लीडर के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शनों ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है, जिससे भारत जैसे तेल आयातक देश पर दबाव पड़ा।
अन्य एशियाई बाजारों में तेजी क्यों?
जापान (Nikkei), दक्षिण कोरिया (Kospi) और हांगकांग (Hang Seng) के बाजार हरे निशान में कारोबार कर रहे थे। इन बाजारों को टेक और AI सेक्टर की मजबूती, क्षेत्रीय नीतिगत समर्थन और कम प्रभावित होने वाले कारकों से फायदा मिला। जबकि भारत में FII (विदेशी संस्थागत निवेशक) की लगातार बिकवाली, ट्रंप प्रशासन की संभावित टैरिफ नीतियां (भारतीय वस्तुओं पर 25-500% टैरिफ की आशंका) और ईरान संकट से जुड़ी ऊर्जा चिंताएं प्रमुख वजह बनीं।
प्रमुख कारण
- ईरान में अशांति का असर: ईरान में दिसंबर 2025 से जारी प्रदर्शन अब पूरे देश में फैल चुके हैं। इंटरनेट शटडाउन और हिंसक कार्रवाई के बावजूद लोग सड़कों पर हैं। इससे कच्चा तेल की कीमतों में उछाल आया, जो भारत के लिए नकारात्मक है (भारत 85%+ तेल आयात करता है)।
- FII बिकवाली: जनवरी में FII ने भारी बिकवाली की, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ा।
- ट्रंप की टैरिफ धमकी: अमेरिका द्वारा रूसी तेल खरीद पर भारत पर अतिरिक्त टैरिफ की आशंका ने निवेशकों को सतर्क किया।
- घरेलू कारक: पिछले सप्ताह की लगातार 5 सत्रों की गिरावट (करीब 9 लाख करोड़ का मार्केट कैप गंवाया) का असर जारी।






