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January 15, 2026 10:50 pm

सत्ता बदली तो क्या टूट सकता है ईरान? आधे पर्शियन, बाकी अजेरी- बलोच… कुर्द पर शंका

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ईरान में जनवरी 2026 में देशव्यापी विरोध प्रदर्शन तेजी से बढ़ रहे हैं, जो आर्थिक संकट से शुरू होकर अब खामेनेई शासन के खिलाफ खुली चुनौती बन चुके हैं। यह आंदोलन दिसंबर 2025 के अंत से शुरू हुआ था, मुख्य रूप से ईरानी रियाल के गिरावट, महंगाई और जीवनयापन की बढ़ती मुश्किलों के कारण। अब यह पूरे देश में फैल चुका है, जिसमें तेहरान, केरमानशाह, शिराज, मशहद जैसे प्रमुख शहर शामिल हैं। प्रदर्शनकारी खुले तौर पर “डेथ टू डिक्टेटर”, “खामेनेई को मरना होगा”, “शाह जिंदाबाद” और “पहलवी वापस आएंगे” जैसे नारे लगा रहे हैं।

वर्तमान स्थिति (10 जनवरी 2026 तक)

  • प्रदर्शन 14 दिनों से अधिक समय से जारी हैं और अब 100 से ज्यादा शहरों तक पहुंच चुके हैं।
  • सुरक्षा बलों की कार्रवाई में दर्जनों (कुछ रिपोर्टों में 45 से 200 तक) मौतें हो चुकी हैं, सैकड़ों घायल और हजारों गिरफ्तार।
  • सरकार ने इंटरनेट ब्लैकआउट लगा दिया है, जिससे जानकारी का प्रवाह सीमित हो गया है।
  • महिलाएं प्रमुख भूमिका निभा रही हैं—खामेनेई की जलती तस्वीरों से सिगरेट जलाने जैसे प्रतीकात्मक विरोध बहुत चर्चित हो रहे हैं।
  • कुछ जगहों पर खोमैनी की कब्र और सरकारी इमारतों पर हमले की खबरें हैं।

सत्ता परिवर्तन की संभावना

यह आंदोलन अब सुधार से आगे बढ़कर शासन परिवर्तन की मांग कर रहा है। खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों को “वांडल्स” और “सबोटर्स” कहा है, अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है, और सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। लेकिन ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट कहा है कि अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर घातक बल प्रयोग हुआ तो अमेरिका “उनकी रक्षा” के लिए आएगा।

निर्वासित नेता रेजा पहलवी (पहलवी राजवंश के उत्तराधिकारी) की वापसी की बात हो रही है, और कुछ जगहों पर पुराना शेर-सूरज वाला झंडा लहराया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सुरक्षा बलों में दरार आई या आंदोलन और लंबा चला, तो शासन परिवर्तन संभव है, लेकिन अभी तक यह निर्णायक मोड़ पर नहीं पहुंचा।

जातीय विभाजन और देश टूटने की आशंका

ईरान की आबादी विविध है (लगभग 8.8 करोड़):

  • पर्शियन (61%) — मुख्य रूप से केंद्र में, सत्ता पर मजबूत पकड़।
  • अजेरी (अजरबैजानी) — 16-18%।
  • कुर्द — 10 मिलियन, उत्तर-पश्चिम में बहुसंख्यक, ऐतिहासिक दमन का शिकार।
  • बलोच, अरब, तुर्कमेन — सीमावर्ती इलाकों में।

कुर्द क्षेत्रों (जैसे इलाम, केरमानशाह) में प्रदर्शन सबसे उग्र हैं, जहां जातीय असंतोष और गरीबी मिलकर आग भड़का रहे हैं। कुछ विशेषज्ञों (जैसे आजतक के लेख में) का कहना है कि खामेनेई के जाने पर कुर्द अलगाववाद बढ़ सकता है, और देश टुकड़ों में बंटने का खतरा है—खासकर अगर बाहरी ताकतें (जैसे अमेरिका) हस्तक्षेप करें। हालांकि, ईरान का बहु-जातीय ढांचा अभी एकजुट है, और पूर्ण विघटन की संभावना कम मानी जा रही है, लेकिन क्षेत्रीय अशांति बढ़ सकती है।

ईरान के लोग दशकों की दमनकारी नीतियों, आर्थिक तबाही और विदेश नीति (जैसे हमास-हिजबुल्लाह को समर्थन) से तंग आ चुके हैं। यह आंदोलन 2022 की महिला-जीवन-आजादी से भी बड़ा लग रहा है। स्थिति बहुत नाजुक है—शासन दबाव में है, लेकिन अभी सत्ता परिवर्तन की पुष्टि नहीं हो सकती। दुनिया की नजरें तेहरान पर टिकी हैं।

DIYA Reporter
Author: DIYA Reporter

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