ईरान में इस्लामी शासन के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शन अब विकराल रूप धारण कर चुके हैं। दिसंबर 2025 के अंत से शुरू हुए इन प्रदर्शनों में आर्थिक संकट, महंगाई और मुद्रा अवमूल्यन के खिलाफ शुरूआत हुई थी, लेकिन अब यह पूरे देश में शासन विरोधी आंदोलन में बदल चुका है। सुरक्षाबलों द्वारा कई शहरों में गोलीबारी और क्रूर दमन की घटनाएं बढ़ गई हैं, जिससे मौतों का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है।
एक तेहरान के डॉक्टर ने टाइम मैगजीन को गुमनाम रहते हुए बताया कि राजधानी के केवल छह अस्पतालों में ही 217 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों की मौत दर्ज की गई है, जिनमें से अधिकांश लाइव गोलीबारी से हुई। ज्यादातर मृतक युवा हैं, और कई पुलिस स्टेशन के बाहर मशीन गन फायर से मौके पर ही मारे गए। अधिकारियों ने शवों को अस्पतालों से हटा दिया है।
मानवाधिकार संगठनों जैसे एमनेस्टी इंटरनेशनल, ह्यूमन राइट्स वॉच और सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स इन ईरान ने कम से कम 28-36 मौतें (कई बच्चों सहित) की पुष्टि की है, लेकिन वास्तविक संख्या इससे कहीं ज्यादा होने की आशंका है। हजारों घायल हैं, और 2000 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुई हैं। सुरक्षाबलों ने अस्पतालों पर छापे मारे, घायलों को गिरफ्तार किया और इलाज में बाधा डाली। इंटरनेट ब्लैकआउट 24 घंटे से ज्यादा समय से जारी है।
प्रदर्शनकारी “डेथ टू द डिक्टेटर”, “डेथ टू खामेनेई”, “इस साल बलिदान का साल, सैयद अली (खामेनेई) गिरेगा” जैसे नारे लगा रहे हैं। तेहरान के ग्रैंड बाजार, इस्फहान, शिराज, मशहद और अन्य शहरों में दुकानें बंद, सड़कें जाम और आगजनी की घटनाएं। रेजा पहलवी (पूर्व शाह के बेटे) ने प्रदर्शनकारियों को सड़कों पर उतरने और ट्रंप से मदद मांगने की अपील की है।
खामेनेई का रुख और ट्रंप से टकराव सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों को “विदेशी एजेंट” और “ट्रंप के लिए सड़कें बर्बाद करने वाले” बताया। उन्होंने ट्रंप को फिरौन, निमरूद और मोहम्मद रजा पहलवी जैसे तानाशाहों से जोड़ा, कहा कि उनका भी अहंकार के चरम पर पतन होगा। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हिंसा हुई तो अमेरिका हस्तक्षेप करेगा।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया अमेरिका, यूरोपीय संघ और अन्य देशों ने दमन की निंदा की है। स्थिति तेजी से बिगड़ रही है, और प्रदर्शन 13वें दिन में प्रवेश कर चुके हैं। ईरान में इंटरनेट और संचार बंद होने से सटीक जानकारी मिलना मुश्किल है, लेकिन मौतों और गिरफ्तारियों का सिलसिला जारी है। दुनिया की नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या यह आंदोलन 1979 की क्रांति जैसा रूप लेगा।






