नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (6 जनवरी 2026) को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) को कड़ी फटकार लगाई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने CAQM की कार्यशैली को “गैर-गंभीर” करार देते हुए कहा कि आयोग न तो प्रदूषण के सटीक कारणों की पहचान करने में जल्दबाजी दिखा रहा है और न ही दीर्घकालिक समाधान प्रस्तुत कर रहा है।
कोर्ट ने CAQM को स्पष्ट निर्देश दिया कि दो हफ्ते के अंदर विभिन्न डोमेन विशेषज्ञों की बैठक बुलाई जाए और उनके विचार-विमर्श के आधार पर दिल्ली-NCR में AQI के बिगड़ने के मुख्य कारणों की एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाए। यह रिपोर्ट सार्वजनिक डोमेन में रखी जाए, ताकि आम जनता को पता चले कि विशेषज्ञों के अनुसार प्रदूषण की जड़ क्या है। कोर्ट ने जोर दिया कि कारणों की पहचान पहले होनी चाहिए, समाधान बाद में—क्योंकि बिना जड़ जानें कोई ठोस योजना नहीं बन सकती।
कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां:
- CJI सूर्यकांत ने कहा, “एक विशेषज्ञ निकाय होने के नाते CAQM की पहली जिम्मेदारी यह बताना है कि दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण के प्रमुख कारण क्या हैं।”
- कोर्ट ने पराली जलाने को हमेशा मुख्य दोषी ठहराने की प्रवृत्ति पर सवाल उठाया। CJI ने उदाहरण दिया कि कोविड काल में पराली जलाई गई थी, लेकिन तब दिल्ली का आसमान साफ था और तारे दिखाई दे रहे थे। इससे साफ है कि प्रदूषण के कारण बहुआयामी हैं।
- वाहनों पर टिप्पणी करते हुए CJI ने कहा, “कार अब स्टेटस सिंबल बन चुकी है, लोग साइकिल का इस्तेमाल छोड़ चुके हैं।”
- टोल प्लाजा से जुड़े ट्रैफिक जाम और प्रदूषण के मुद्दे पर भी CAQM से जवाब मांगा गया।
- कोर्ट ने CAQM की दो महीने की मोहलत मांग को खारिज कर दिया और कहा कि देरी से समस्या और जटिल हो जाएगी।






