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January 15, 2026 6:51 pm

डिजिटल चौपाल से विकास की आवाज, सीएससी केंद्रों की कमान संभाल रहीं दौसा की महिलाएं

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दौसा। घनश्याम प्रजापत | मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी भारत सरकार का उपक्रम कॉमन सर्विस सेंटर संचालन से सरकारी योजनाओं को आमजन तक पहुंचाने की तस्वीर अब बदल रही है।जिला प्रबंधक कमलेश कुमार शर्मा ने बताया कि दौसा जिले में करीब 50 से अधिक कॉमन सर्विस सेंटर (कॉमन सर्विस केंद्र) का संचालन महिलाएं कर रही हैं। ये महिला संचालक केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं के लिए आवेदन कराकर ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं की मजबूत कड़ी बन रही हैं।
डिजिटल इंडिया अभियान के तहत संचालित सीएससी केंद्र अब केवल सेवा केंद्र नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण और सुशासन का मजबूत माध्यम बन चुके हैं। किसान, मजदूर, बुजुर्ग और महिलाएं अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने के बजाय अपने नजदीकी सीएससी केंद्र पर ही समाधान पा रहे हैं।
महिलाओं की अगुवाई में कॉमन सर्विस सेंटर संचालन से न केवल योजनाओं की पहुंच बढ़ी है, बल्कि भरोसे और पारदर्शिता का वातावरण भी मजबूत हुआ है। प्रशासन की ओर से प्रशिक्षण व तकनीकी सहयोग से आने वाले समय में और अधिक महिला सीएससी संचालकों को जोड़ने की योजना है।
महिलाएं बनीं योजनाओं की धुरी, सीएससी केंद्रों के जरिए दौसा में घर-घर पहुंच रहा सरकारी लाभ
घर की चौखट से निकलकर अब महिलाएं गांव-गांव डिजिटल बदलाव की अगुआ बन रही हैं। दौसा जिले में लगभग सीएससी केंद्रों का सफल संचालन महिलाएं कर रही हैं, जहां से केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ सीधे आमजन तक पहुंचाया जा रहा है

महिलाओं के लिए भरोसे का केंद्र

महिला संचालकों के कारण महिलाओं, बुजुर्गों और जरूरतमंदों को खास सुविधा मिल रही है। महिलाएं खुलकर अपनी समस्याएं साझा कर पा रही हैं और योजनाओं की जानकारी लेने में सहज महसूस कर रही हैं। इससे सरकारी योजनाओं की भागीदारी भी बढ़ी है।

आत्मनिर्भरता की नई पहचान

सीएससी केंद्र संचालन से महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं। डिजिटल प्रशिक्षण और तकनीकी अनुभव से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। कई महिलाएं अब अन्य महिलाओं को भी प्रशिक्षण देकर रोजगार की राह दिखा रही हैं।

सरकार की सोच, जमीन पर असर

महिलाओं को सीएससी संचालन से जोड़ने की पहल से सरकार की ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘नारी सशक्तिकरण’ की सोच जमीन पर उतरती दिख रही है। प्रशासन का मानना है कि महिला सहभागिता से योजनाओं की पहुंच और प्रभावशीलता दोनों बढ़ रही हैं।
दौसा में सीएससी चला रहीं महिलाएं यह साबित कर रही हैं कि जब महिलाएं आगे आती हैं, तो विकास की रफ्तार खुद-ब-खुद तेज हो जाती है।

महिलाओं के लिए महिलाएं बनीं सहारा

महिला संचालकों की मौजूदगी से महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों को खास राहत मिल रही है। महिलाएं बिना संकोच अपनी समस्याएं साझा कर पा रही हैं और योजनाओं की जानकारी भी आसानी से प्राप्त कर रही हैं। यही कारण है कि सीएससी केंद्रों पर महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।

आर्थिक मजबूती के साथ बढ़ा आत्मविश्वास

सीएससी संचालन से महिलाएं न केवल नियमित आय अर्जित कर रही हैं, बल्कि तकनीकी दक्षता भी हासिल कर रही हैं। इससे परिवार में उनकी भूमिका मजबूत हुई है और समाज में सम्मान भी बढ़ा है। कई महिला संचालक अन्य महिलाओं को भी डिजिटल कार्यों का प्रशिक्षण देकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

प्रशासन और सरकार की सोच को मिल रहा आकार

जिला प्रशासन और सीएससी प्रबंधन के सहयोग से महिलाओं को प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और मार्गदर्शन दिया जा रहा है। आने वाले समय में जिले में महिला संचालकों की संख्या बढ़ाने की योजना है, ताकि सरकारी योजनाओं की पहुंच और मजबूत हो सके।
जिला प्रबंधक कमलेश कुमार शर्मा ने बताया कि दौसा जिले में सीएससी केंद्र संचालन महिलाएँ ललिता मीणा उदयपुरा.चूडियावास,नांगल राजावतान,
केशंता देवी सलेमपुरा राहुवास,
सीमा सोनी घूमना सिकराय,
निरमा सैनी रसीदपुर महवा,
सोनिया मीना बनावड महवा,
नीलम सैनी आगरा रोड दौसा,
केशंता मीणा चिमनपुरा.तलाब गांव लालसोट,ज्योति राजोरिया ढिगारिया भीम बैजूपाडा बांदीकुई,
सन्तोष सैनी आलूदा नांगल राजावतान,
ज्योति शर्मा गुप्तेश्वर रोड दौसा,
ललिता सैनी न्यू मंडी रोड दौसा,
सीमा सैनी न्यू मंडी रोड दौसा,
विमला मीणा गढ गुमानपुरा सिकराय,
लक्ष्मी शर्मा झूला चौक डिडवाना लालसोट,
सुनिता सैनी सिकन्दरा दौसा,

सीएससी के के जरिए जिस तरह डिजिटल सेतु बन रही हैं, वह न केवल योजनाओं की सफलता की कहानी है, बल्कि महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण भी है। योजनाओं की डोर अब महिलाओं के हाथ, सीएससी केंद्रों से दौसा में सशक्तिकरण की नई इबारत तैयार हो रही हैं
डिजिटल इंडिया के तहत शुरू हुए सीएससी केंद्र अब केवल तकनीकी सेवा केंद्र नहीं, बल्कि सुशासन, पारदर्शिता और महिला आत्मनिर्भरता के मजबूत आधार बनते जा रहे हैं। महिला संचालकों की सक्रियता से किसानों, मजदूरों, बुजुर्गों और जरूरतमंद वर्ग को सरकारी लाभ समय पर और बिना भटकाव के मिल रहा है।
महिलाओं की मौजूदगी से सीएससी केंद्रों पर भरोसा बढ़ा है। प्रशासन के सहयोग और प्रशिक्षण से भविष्य में महिला संचालकों की संख्या और बढ़ाने की तैयारी है।
डिजिटल सखी बन रहीं महिलाएं, कॉमन सर्विस सेंटर से बदली गांव-गांव की तस्वीर कभी सरकारी योजनाओं की जानकारी के लिए कार्यालयों की लंबी कतारें आम बात थीं, लेकिन अब वही काम गांव में बैठी महिलाएं डिजिटल माध्यम से कर रही हैं। दौसा जिले में संचालित सीएससी केंद्रों ने महिलाओं को न सिर्फ पहचान दी है, बल्कि उन्हें डिजिटल सखी और सेवा दूत के रूप में स्थापित किया है।
कॉमन सर्विस केंद्र के माध्यम से इन महिला संचालकों द्वारा ई-श्रम कार्ड,पैन कार्ड बनवाने व अपडेट करने, पेंशन आवेदन,
प्रधानमंत्री जन धन योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा, अटल पेंशन योजना, प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना, ई-श्रम, प्रधानमंत्री मानधन योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, डीजीपे वेब, इंश्योरेंस, बैंकिंग लोन, यात्रा से जुड़ी सेवाएं, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा संबंधित सेवाएं जिसका आमजन को भरपूर लाभ मिल सके इत्यादि सेवाओं को और इसके साथ ग्रामीण ई-स्टोर एप, जीवन बीमा, साधारण बीमा, पशु बीमा, फसल बीमा, रेल टिकट, बस टिकट, फ्लाइट टिकट, दवाइयां, टेलीमेडिसिन के द्वारा सहायता, सभी प्रकार के लोन की सेवा, टेली लॉ, कानूनी सलाह, सरकारी परीक्षा,कृषि सेवाओं,ओलंपियाड, योग्यता एप के साथ-साथ अन्य शिक्षा से जुड़े हुए कोर्सेज की जैसी सेवाएं आमजन को एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराई जा रही हैं।

महिलाओं के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद मंच

महिला संचालकों के कारण महिलाओं और बुजुर्गों को विशेष सुविधा मिल रही है। योजनाओं से जुड़ी जानकारी लेने और आवेदन कराने में वे खुद को अधिक सहज महसूस कर रही हैं। इससे सरकारी योजनाओं में महिला सहभागिता भी बढ़ी है। आर्थिक मजबूती से बदली सामाजिक तस्वीर सीएससी संचालन से महिलाएं नियमित आय अर्जित कर रही हैं। डिजिटल दक्षता से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और परिवार व समाज में निर्णय प्रक्रिया में उनकी भूमिका मजबूत हुई है। कई महिला संचालक अन्य महिलाओं को भी प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ रही हैं।

नीति से जमीन तक असर

महिला सीएससी संचालकों की सफलता सरकार की उस सोच को साकार कर रही है, जिसमें डिजिटल इंडिया और नारी सशक्तिकरण को साथ-साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि महिला भागीदारी से योजनाओं की पहुंच और प्रभाव दोनों में सुधार हुआ है।
दौसा की महिलाएं सीएससी के माध्यम से यह संदेश दे रही हैं कि जब अवसर और तकनीक मिलती है, तो महिलाएं बदलाव की सबसे मजबूत कड़ी बन जाती हैं।

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