नई दिल्ली, 4 जनवरी 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए यूनियन बजट 2025-26 को मध्यम वर्ग के लिए ऐतिहासिक राहत वाला बजट माना जा रहा है। बजट में न्यू टैक्स रिजीम को पूरी तरह रीडिजाइन किया गया है, जिससे यह अधिक सरल, कम दरों वाला और आकर्षक हो गया है। सबसे बड़ी घोषणा यह है कि न्यू रिजीम में 12 लाख रुपये तक की सालाना आय पर कोई इनकम टैक्स नहीं लगेगा।
मिडिल क्लास पर फोकस वित्त मंत्री ने बजट भाषण में कहा कि मध्यम वर्ग राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए, सरकार ने न्यू टैक्स रिजीम में स्लैब्स और दरों को संशोधित किया है, ताकि औसत मासिक आय 1 लाख रुपये तक वाले लोगों को टैक्स से छूट मिले। वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन 75,000 रुपये होने से प्रभावी रूप से 12.75 लाख रुपये तक की आय टैक्स-फ्री हो गई है।
न्यू टैक्स रिजीम के नए स्लैब (FY 2025-26 से लागू)
- 0 से 4 लाख रुपये: 0% टैक्स
- 4 से 8 लाख रुपये: 5%
- 8 से 12 लाख रुपये: 10%
- 12 से 16 लाख रुपये: 15%
- 16 से 20 लाख रुपये: 20%
- 20 से 24 लाख रुपये: 25%
- 24 लाख रुपये से ऊपर: 30%
इसके साथ ही सेक्शन 87A के तहत रिबेट बढ़ाकर 12 लाख तक की आय पर जीरो टैक्स सुनिश्चित किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन बदलावों से मध्यम वर्ग की बचत और खर्च करने की क्षमता बढ़ेगी, जिससे अर्थव्यवस्था को बूस्ट मिलेगा।
अन्य प्रमुख राहतें
- TDS/TCS नियमों में सरलीकरण, जिससे अनुपालन आसान।
- पुराने टैक्स रिजीम में कोई बदलाव नहीं, लेकिन न्यू रिजीम को इतना आकर्षक बनाया गया कि अधिकांश टैक्सपेयर इसे चुनेंगे।
- कैपिटल गेंस टैक्स में भी सरलीकरण, लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेंस पर 12.5% की एकसमान दर।
प्रभाव और प्रतिक्रियाएं बजट से करीब 1 करोड़ टैक्सपेयर्स को फायदा होगा। 12 लाख आय वाले व्यक्ति को पहले की तुलना में 80,000 रुपये तक की बचत होगी। अर्थशास्त्रियों ने इसे “मिडिल क्लास का बजट” करार दिया है, जो उपभोग और निवेश को बढ़ावा देगा। सरकार का अनुमान है कि इन राहतों से राजस्व में 1 लाख करोड़ रुपये की कमी आएगी, लेकिन इससे अर्थव्यवस्था में नई गति आएगी।






