Explore

Search

January 28, 2026 7:10 am

SMS हॉस्पिटल इमरजेंसी में लापरवाही की कीमत चुका रहे हार्ट मरीज NT-ProBNP जांच बंद; बाहर प्राइवेट लैब भेजे

WhatsApp
Facebook
Twitter
Email

 

प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सवाई मानसिंह (SMS) हॉस्पिटल की इमरजेंसी इन दिनों खुद “इमरजेंसी” की हालत में है। यहां हार्ट से जुड़ी गंभीर शिकायत लेकर आने वाले मरीजों को जरूरी जांच के लिए अस्पताल से बाहर प्राइवेट लैब में भेजा जा रहा है। वजह कोई तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि घोर प्रशासनिक लापरवाही है। हार्ट फेलियर की पहचान के लिए जरूरी जांच पिछले दो-तीन दिनों से बंद पड़ी है, क्योंकि जांच की किट इमरजेंसी तक पहुंचाई ही नहीं गई।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जांच किट हॉस्पिटल स्टोर में मौजूद है, लेकिन उसे इमरजेंसी तक मंगवाने की जहमत किसी ने नहीं उठाई। इस लापरवाही का सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है। सरकारी अस्पताल में मुफ्त या नाममात्र शुल्क में होने वाली जांच के लिए मरीजों को प्राइवेट लैब में 2200 से 2600 रुपए तक चुकाने पड़ रहे हैं।

तेज सर्दी के मौसम में हार्ट के मरीजों की संख्या पहले ही बढ़ जाती है। खासकर बुजुर्ग और पुराने कार्डियक पेशेंट्स को ठंड में सांस फूलने, सीने में दर्द, घबराहट जैसी शिकायतें ज्यादा होती हैं। यही वजह है कि इन दिनों SMS की कार्डियक ओपीडी और इमरजेंसी में हार्ट से जुड़े मरीजों की संख्या सामान्य दिनों से कहीं ज्यादा है।

ऐसे मरीजों की प्रारंभिक जांच में कार्डियक समस्या की आशंका होने पर ट्रॉप-टी और NT-ProBNP जैसी जांचें इमरजेंसी में ही की जाती हैं, ताकि समय रहते हार्ट फेलियर या अन्य गंभीर स्थिति का पता लगाया जा सके। लेकिन NT-ProBNP जांच बंद होने से डॉक्टरों के सामने भी मजबूरी की स्थिति बन गई है।

इमरजेंसी में तैनात कर्मचारियों और अधिकारियों के अनुसार, जांच किट मंगवाने की जिम्मेदारी नर्सिंग स्टाफ की होती है। इमरजेंसी के नर्सिंग इंचार्ज गोवर्धन छुट्टी पर गए थे और उन्होंने चार्ज नर्सिंग कर्मचारी विजय को सौंपा। लेकिन विजय भी छुट्टी पर चले गए, वो भी बिना किसी अन्य जिम्मेदार को चार्ज दिए। नतीजा यह हुआ कि इमरजेंसी में NT-ProBNP जांच पूरी तरह ठप हो गई।

यह सवाल खड़ा करता है कि प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल की इमरजेंसी व्यवस्था क्या दो कर्मचारियों की छुट्टी पर निर्भर है? और क्या मरीजों की जान से जुड़ी जांचों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होनी चाहिए?

एक तरफ मरीज बीमारी से जूझ रहे हैं, दूसरी तरफ उन्हें आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है। कई मरीज ऐसे हैं जो दूर-दराज के इलाकों से सरकारी इलाज की उम्मीद लेकर SMS आते हैं। इमरजेंसी में भर्ती होने के बावजूद जब उन्हें जांच के लिए बाहर भेजा जाता है, तो यह न सिर्फ समय की बर्बादी है, बल्कि इलाज में देरी का भी खतरा पैदा करता है।

इमरजेंसी के इंचार्ज डॉ. सतीश मीणा ने बताया मैंने आज ही इमरजेंसी का चार्ज संभाला है। मरीजों की शिकायत आने पर जब स्टाफ से जांच बंद होने का कारण पूछा, तो पता चला कि नर्सिंग के दोनों इंचार्ज छुट्टी पर हैं और किट इमरजेंसी में उपलब्ध नहीं है। मैंने तुरंत स्टोर से संपर्क कर किट जारी करने के निर्देश दिए हैं। किट आते ही जांच दोबारा शुरू कर दी जाएगी।”

हालांकि प्रशासन की ओर से जांच जल्द शुरू होने का आश्वासन दिया गया है, लेकिन यह घटना SMS जैसे बड़े अस्पताल की प्रबंधन व्यवस्था और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जब जांच किट मौजूद होने के बावजूद मरीजों को बाहर भेजा जाए, तो इसे केवल चूक नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता ही कहा जाएगा। सवाल यही है—इस लापरवाही की जिम्मेदारी कौन लेगा और मरीजों को हुए नुकसान की भरपाई कैसे होगी?

DIYA Reporter
Author: DIYA Reporter

ताजा खबरों के लिए एक क्लिक पर ज्वाइन करे व्हाट्सएप ग्रुप

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement
लाइव क्रिकेट स्कोर