इंदौर, 28 नवंबर 2025: जिम्मी एवं जनक मैगिलिगन फाउंडेशन फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट ने अपनी शादी की 37वीं वर्षगांठ के अवसर पर 27 नवंबर 2025 को सनावदिया स्थित “गिरिदर्शन” में एक प्रेरणादायक कार्यशाला “सस्टेनेबल मैरिज” का आयोजन किया। इस कार्यशाला का मुख्य संदेश था – “शादी में कचरा नहीं करना और बाद में शादी का कचरा नहीं करना”।
कार्यक्रम की शुरुआत जीवांश बत्रा के शंखनाद और जनक दीदी की बहाई प्रार्थना से हुई। मुख्य अतिथि प्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका कलापिनी कोमकली को पौधा भेंट कर सम्मानित किया गया। कलापिनी जी ने कहा, “शादी को व्यवसाय नहीं बनाना चाहिए। यह जीवन का पवित्र बंधन है, जिसे दिखावे और फिजूलखर्ची का मंच नहीं बनना चाहिए। सच्ची परंपराओं को ईमानदारी से निभाना चाहिए।”
अपने संबोधन में डॉ. श्रीमती जनक पलटा मैगिलिगन (जनक दीदी) ने भावुक स्वर में कहा, “आज हमारी शादी की 37वीं वर्षगांठ है, पर शारीरिक दांपत्य केवल 23 साल का रहा। 21 अप्रैल 2011 को जिम्मी इस दुनिया से चले गए। भारतीय परंपरा में विधवा स्त्री को सुहाग की सभी निशानियां त्यागनी पड़ती हैं और उसे शुभ अवसरों से वंचित कर दिया जाता है, जबकि पुरुष पर ऐसा कोई बंधन नहीं। हम दोनों बहाई धर्म के अनुयायी रहे और दांपत्य जीवन को मानवता के पक्षी के दो समान पंखों की तरह जीने का प्रयास किया।”
जनक दीदी ने अपनी 37 साल पुरानी शादी की साड़ी दिखाते हुए कहा, “यही साड़ी मैं हर साल वर्षगांठ पर पहनती हूं। हमारा सिद्धांत रहा है – शादी में कोई बर्बादी नहीं और शादी के बाद कोई आर्थिक बोझ नहीं।” उन्होंने कम खर्च, प्लास्टिक-मुक्त, जीरो-वेस्ट विवाह के कई सफल उदाहरण साझा किए।
कार्यशाला में कई लोगों ने अपनी सस्टेनेबल शादियों की कहानियां सुनाईं:
- डॉ. भरत रावत की मां श्रीमती विद्यावती रावत व पत्नी अंजलि रावत ने बेटी डॉ. काव्या की शादी में छोटी गेस्ट लिस्ट, कांच-मेटल के बर्तन, कोई डिस्पोजेबल नहीं, फूड वेस्ट प्रोसेसिंग जैसे कदम अपनाए।
- डॉ. क्षमा पैठणकर ने बताया कि उनकी भांजी ईशा की शादी में जनक दीदी के मार्गदर्शन से पूरी तरह प्लास्टिक-मुक्त, अखबार-कलेवे से पैकिंग, कपड़े के फूल और मोतियों की रंगोली बनाई गई।
- डॉ. यामिनी रमेश व डॉ. वैभव जैन दंपती ने अपनी शादी में उपहार लेने से इंकार कर मेहमानों से देहदान-नेत्रदान का संकल्प करवाया, जिससे 17 देहदान और 278 नेत्रदान फॉर्म भरे गए।
स्वाहा कंपनी के डायरेक्टर रोहित अग्रवाल ने बताया कि इंदौर में शादी समारोहों से सबसे ज्यादा फूड वेस्ट निकलता है। शादी के सीजन में एक दिन में 4000 किलो तक कचरा इकट्ठा होता है। उन्होंने छोटा मेनू रखने को सबसे कारगर कदम बताया।
सेंट पॉल इंस्टीट्यूट, महारानी लक्ष्मीबाई कॉलेज व श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के छात्र-छात्राओं व फैकल्टी ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सेंट पॉल की फैकल्टी डॉ. विधि परयानी ने कहा, “जनक दीदी से सीखा कि छोटा कदम भी बड़ा बदलाव ला सकता है। दूल्हा-दुल्हन यदि साथ मिलकर जीरो-वेस्ट शादी का संकल्प लें, तो समाज बदलेगा। दिखावे की शादी पल भर की खुशी देती है, सस्टेनेबल मैरिज आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनती है।”
कार्यशाला का समापन जनक दीदी के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ। यह आयोजन यह संदेश लेकर समाप्त हुआ कि प्रेम, सादगी और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी ही सच्ची और टिकाऊ शादी की नींव है।






