गाजा युद्ध विराम वार्ता के बीच में गाजा पर भविष्य में कौन शासन करेगा, ये मुद्दा युद्ध विराम में बड़ी रुकावट बना हुआ है. इजराइली प्रधानमंत्री ने साफ किया है कि वह गाजा से हमास के खात्मे तक जंग जारी रखेंगे. अब फिलिस्तीनी प्राधिकरण के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने रविवार को हमास से हथियार डालने, बंधकों को रिहा करने और गाजा का नियंत्रण फिलिस्तीनी प्राधिकरण (PA) को सौंपने का आग्रह किया है.
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फिलिस्तीन अथॉरिटी को UN में फिलिस्तीन का पक्ष रखने के लिए मान्यता दी गई है. ये अथॉरिटी वेस्ट बैंक में शासन चलाती है, जिसकी प्रशासनिक राजधानी रामअल्लाह है. PA कई फिलिस्तीनी संगठनों से मिलकर बनी एक बॉडी है, जिसको अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त है. इसमें सबसे बड़ा ग्रुप फतह (Fatah) है. महमूद अब्बास इसी समूह से आते हैं और उन्हें फिलिस्तीन का राष्ट्रपति माना जाता है.
फतह का हमास के साथ पुराना विवाद रहा है, 2006 में हमास ने गाजा का चुनाव जीतने के बाद फतह को गाजा से बाहर कर दिया था. तभी से फिलिस्तीन के शासन दो हिस्सों में बंटा हुआ है, जिसमें वेस्ट बैंक में फतह का राज और गाजा को हमास चलाता है. अब जब हमास पिछले दो सालों से इजराइल से युद्ध लड़ रहा है और कमजोर हो चुका है, तब फतह नेतृत्व गाजा का कंट्रोल अपने हाथ में लेने के फिराक में है. फिलिस्तीन के लड़ाई लड़ने वाले दोनों ही संगठन की विचारधाराओं में काफी फर्क है और दोनों ने फिलिस्तीन की आजादी के लिए अलग-अलग रास्ते अपनाए हैं.
हमास और फिलिस्तीन अथॉरिटी में क्यों है मतभेद?
फिलिस्तीनी प्राधिकरण (PA) के अध्यक्ष महमूद अब्बास और हमास के बीच मतभेद और विवाद उनके वैचारिक, राजनीतिक और रणनीतिक मतभेदों से जुड़े हैं, दोनों ही संगठनों ने फिलिस्तीनी शासन और व्यापक इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष को आकार दिया है.
अध्यक्ष महमूद अब्बास (दाएं) और पूर्व हमास नेता इस्माइल हनीयाह/ खलील हमरा/AP
फतह या PLO एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्रवादी आंदोलन है. फतह इजराइल को मान्यता देता है और 1967 की सीमाओं पर आधारित दो राष्ट्र समाधान का समर्थन करता है, और फिलिस्तीनी राज्य का दर्जा प्राप्त करने के लिए ओस्लो समझौते जैसी कूटनीति और वार्ता पर जोर देता है.
फतह के नेता महमूद अब्बास हमेशा से इजराइल के खिलाफ सैन्य संघर्ष का विरोध करते हैं और कूटनीतिक तरीके से फिलिस्तीन की आजादी की मांग करते हैं. हालांकि वेस्ट बैंक में ही PA पर आरोप लगाए जाते हैं कि वह इजराइली पपिट की तरह काम करते हैं. ऐसा कई बार देखा गया है कि PA के सुरक्षा बलों ने इजराइल के खिलाफ संघर्ष करने वाले वेस्ट बैंक के नौजवानोपर कार्रवाई की है.
वहीं हमास जो हरकत अल-मुक़ावामा अल-इस्लामिया (इस्लामिक प्रतिरोध आंदोलन) का संक्षिप्त रूप है, ये एक इस्लामी संगठन है जो इजराइल के वजूद को नहीं मानता है, लेकिन 1967 की सीमाओं के तहत एक फिलिस्तीनी राज्य को आरजी तौर पर स्वीकार करने की इच्छा जताता रहा है. यह इजराइली कब्जे के खिलाफ सशस्त्र प्रतिरोध पर जोर देता है और इसे आजादी के लिए एक वैध साधन मानता है.
हमास की इज़्ज़ अल-दीन अल-कस्साम ब्रिगेड नाम की एक मिलिट्री विंग है, जो इजराइल के खिलाफ सैन्य मिशनों को अंजाम देती है. इसके अलावा सामाजिक कल्याण कार्यक्रम चलाकर भी हमास अपने जमीनी समर्थन को बढ़ाता है.
इजराइल के लिए कौन बड़ा खतरा है?
PLO जिसे फतह के नाम से भी जाना जाता है, ने यासिर अराफात के नेतृत्व में 1993 में इजराइल के ओसलो अकॉर्ड पर साइन कर इजराइल के खिलाफ किसी भी सैन्य संघर्ष को त्याग दिया था. इस समझौते के तहत फिलिस्तीन अथॉरिटी बनाई गई थी, जिसको गाजा और वेस्ट बैंक पर शासन करने का अधिकार दिया गया था. लेकिन ये अपनी सेना नहीं रख सकती थी. बदले में PLO ने भी इजराइल को मान्यता दी थी. इसके बाद PLO की तरफ से इजराइल के लिए खतरा लगभग खत्म हो गया है. इजराइल ओसलो अकॉर्ड पर साइन करने के बाद भी वेस्ट बैंक में अपने कब्जे को लगातार बढ़ा रहा है.
वहीं हमास 1987 में मुस्लिम ब्रदरहुड से बना था, जिसका मकसद इजराइल के कब्जे को सैन्य संघर्ष से खत्म करना था. तभी से हमास इजराइल के नाक में दम किए हुए हैं और उसके खिलाफ कई ऑपरेशन को अंजाम दे चुका है. जिसमें से 7 अक्टूबर 2023 में ऑपरेशन अल-अक्सा फ्लड सबसे खतरनाक था, जिसनें इजराइल के खुफिया तंत्र की कमजोरियों की पोल खोल दी और गाजा युद्ध शुरू हो गया है.
