हे चेतना के पुत्र ! दीन-हीन पर शेखी न बघार, क्योंकि मैं उस मार्गदर्शन करता हूँ और जब तुझे कुचेष्टा करते हुए देखन हूँ तब सर्वदा के लिए तुझको हतबुद्धि कर देता हूँ।—बहाउल्लाह
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