भोजपुर (बिहार)। नौकरी के बड़े-बड़े वादों में फंसकर कंबोडिया पहुंचे भोजपुर जिले के दो युवक पिछले 42 दिनों से अमानवीय कैद में हैं। वे साइबर ठगी (ऑनलाइन फ्रॉड) करने से इनकार करने पर पासपोर्ट और वीजा जब्त कर लिए गए हैं। युवकों ने परिवार को वीडियो कॉल और मैसेज के जरिए गुहार लगाई है – “जानवरों की तरह रखते हैं, खाना-पानी नहीं देते, हमें बचाइए”। परिवार अब भारत सरकार, विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास से तत्काल मदद की अपील कर रहा है।
युवकों की दर्दनाक कहानी
भोजपुर जिले के रहने वाले दोनों युवक (नाम गोपनीय रखे गए हैं) को स्थानीय एजेंटों ने कंबोडिया में कंप्यूटर ऑपरेटर/आईटी जॉब का लालच देकर फंसाया। अच्छी सैलरी, फ्री रहना-खाना और आसान काम का वादा किया गया। युवकों ने पासपोर्ट और वीजा बनवाया और जनवरी 2026 के अंत में कंबोडिया पहुंचे। लेकिन वहां पहुंचते ही हकीकत सामने आई –
- पासपोर्ट, मोबाइल फोन और वीजा जब्त कर लिए गए।
- उन्हें एक कमरे में बंद कर दिया गया।
- साइबर फ्रॉड (डिजिटल अरेस्ट, शेयर मार्केट स्कैम, सोशल मीडिया फ्रॉड) में शामिल होने के लिए दबाव डाला गया।
- इनकार करने पर मारपीट, खाना-पानी रोकना और अमानवीय व्यवहार शुरू हो गया।
- पिछले 42 दिनों से वे एक कमरे में कैद हैं, जहां बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं।
युवकों ने परिवार को भेजे वीडियो में रोते हुए कहा – “हम यहां जानवरों से भी बदतर हाल में हैं। खाना नहीं देते, पानी कम देते हैं। ठगी नहीं करेंगे तो मार डालेंगे। पासपोर्ट छीन लिया है, बाहर नहीं निकल सकते। कृपया सरकार से मदद मंगवाइए, हमें बचाइए।”
परिवार की स्थिति और अपील
परिवार सदमे में है। एक युवक की मां ने बताया कि एजेंट ने लाखों रुपये लेकर उन्हें विदेश भेजा था, लेकिन अब फोन नहीं उठा रहा। परिवार ने स्थानीय पुलिस, सांसद और विधायक से संपर्क किया है। वे विदेश मंत्रालय और कंबोडिया में भारतीय दूतावास से SOS कर रहे हैं। परिवार का कहना है – “हमारे बेटे निर्दोष हैं। वे ठगी नहीं करना चाहते, इसलिए यातना दी जा रही है। अगर समय पर मदद नहीं मिली तो कुछ भी हो सकता है।”
कंबोडिया में साइबर स्लेवरी का बढ़ता खतरा
कंबोडिया (और म्यांमार, लाओस जैसे देशों) में साइबर स्कैम कंपाउंड का जाल फैला हुआ है। एजेंट भारतीय युवाओं को फर्जी जॉब्स का लालच देकर वहां ले जाते हैं, फिर पासपोर्ट जब्त कर ठगी करवाते हैं। इनकार करने पर यातना, भूखा रखना और कभी-कभी मौत तक की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। हाल के महीनों में:
- कई भारतीय युवा भारतीय दूतावास की मदद से रिहा हुए हैं।
- कंबोडिया पुलिस ने सैकड़ों स्कैम सेंटर बंद किए हैं।
- लेकिन हजारों लोग अभी भी फंसे हुए हैं, खासकर हिंदी भाषी युवा जो आसानी से भारतीयों को ठग सकते हैं।
क्या कर रही है सरकार?
विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास (नोम पेन्ह) ऐसे मामलों में सक्रिय हैं। कई बार दूतावास ने युवाओं को रिहा करवाया और वापस लाया है। लेकिन इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। परिवार ने सोशल मीडिया पर अपील की है कि जल्द से जल्द रेस्क्यू ऑपरेशन हो।
यह मामला एक बार फिर मानव तस्करी और साइबर गुलामी के खिलाफ चेतावनी दे रहा है। युवाओं को विदेशी जॉब ऑफर से पहले पूरी जांच करनी चाहिए। परिवार और समाज से अपील है कि ऐसे एजेंटों की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
युवकों की रिहाई के लिए सभी की दुआएं और सरकार से त्वरित कार्रवाई की मांग जारी है। आगे की अपडेट्स के लिए नजर बनाए रखें।






