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March 25, 2026 7:41 pm

13 साल की दर्द भरी जंग खत्म: नम आंखों से हरीश राणा को दी गई अंतिम विदाई, ग्रीन पार्क में हुआ अंतिम संस्कार

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नई दिल्ली/गाजियाबाद, 25 मार्च 2026 – भारत में पैसिव यूथेनेशिया (निष्क्रिय इच्छामृत्यु) की अनुमति पाने वाले पहले व्यक्ति हरीश राणा का 13 साल लंबे संघर्ष के बाद निधन हो गया। मंगलवार शाम 4:10 बजे दिल्ली के एम्स (AIIMS) अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। बुधवार सुबह 9 बजे दक्षिण दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट पर नम आंखों और भावुक माहौल में उनका अंतिम संस्कार किया गया।

हरीश राणा (31 वर्षीय) गाजियाबाद के रहने वाले थे। वर्ष 2013 में पंजाब यूनिवर्सिटी में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करते समय वे चौथी मंजिल की बालकनी से गिर गए थे, जिससे उनके सिर में गंभीर चोट लगी और वे परमानेंट वेजिटेटिव स्टेट (कोमा जैसी अवस्था) में चले गए। पिछले 13 साल से वे बिस्तर पर अचेत पड़े थे, बेडसोर और अन्य जटिलताओं से जूझ रहे थे।

सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च 2026 को ऐतिहासिक फैसला देते हुए हरीश राणा के माता-पिता की याचिका पर पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति दे दी थी। इसके बाद उन्हें 14 मार्च को गाजियाबाद से एम्स के पैलिएटिव केयर यूनिट में शिफ्ट किया गया। जीवन रक्षक उपकरण धीरे-धीरे हटाए गए और मंगलवार को उन्होंने शांति से दुनिया को अलविदा कह दिया।

अंतिम संस्कार में भावुक माहौल

ग्रीन पार्क श्मशान घाट पर परिवार, रिश्तेदार, पड़ोसी, दोस्त और ब्रह्माकुमारीज की सदस्यों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार हुआ। हरीश के भाई आशीष राणा और बहन ने मुखाग्नि दी। समारोह में गायत्री मंत्र का जाप किया गया और 10 मिनट का मौन रखा गया।

परिवार के सदस्यों की आंखें नम थीं। पिता ने व्हाट्सएप ग्रुप में संदेश भेजा – “सुबह 9 बजे पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार ग्रीन पार्क, साउथ दिल्ली में किया जाएगा… वह अब एक खुशहाल जगह पर है।” इस संदेश को पढ़ते ही कई लोगों की आंखों से आंसू बह निकले।

हरीश राणा ने अपनी इच्छा अनुसार आंखों (कॉर्निया) और हार्ट वॉल्व का दान किया। परिवार ने भी अंगदान की प्रक्रिया पूरी की, ताकि उनकी मृत्यु भी किसी की जिंदगी रोशन कर सके।

परिवार और समाज की प्रतिक्रिया

परिवार ने बताया कि 13 साल तक उन्होंने हर संभव उपचार और देखभाल की, लेकिन स्थिति अपरिवर्तनीय थी। पड़ोसियों ने कहा, “परिवार ने सब कुछ किया, लेकिन आखिरकार हरीश को पीड़ा से मुक्ति मिली।” कई लोगों ने इसे “गरिमापूर्ण विदाई” बताया।

हरीश राणा का मामला भारत में जीवन और मृत्यु के अधिकार, मरीज की गरिमा और इच्छामृत्यु पर कानूनी बहस का महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने भविष्य में ऐसे मामलों के लिए नई राह खोली है।

अलविदा हरीश राणा… एक लंबी लड़ाई के बाद अब आपको शांति मिली। आपकी कहानी पीड़ा, संघर्ष और गरिमा की मिसाल बनकर रहेगी।

हरीश राणा की पुरानी तस्वीर (दुर्घटना से पहले)

Harish Rana: First Indian to be allowed 'passive euthanasia' dies
India's First Court-Approved Passive Euthanasia Patient Harish Rana Dies  After 13 Years in Vegetative Stat | Outlook India

अंतिम संस्कार के भावुक दृश्य (ग्रीन पार्क श्मशान घाट)

Harish Rana Funeral: India's passive euthanasia case ends in Delhi rites day
He is in a happy place now': Harish Rana's last rites conducted, family to  donate his eyes - The Tribune
Harish Rana Funeral: India's passive euthanasia case ends in Delhi rites day
Harish Rana's family donates his corneas, heart valves after passive  euthanasia; last rites held in Delhi - The Statesman
He is in a happy place now': Harish Rana, India's 1st passive euthanasia  case, cremated - Rediff.com

ग्रीन पार्क श्मशान घाट का दृश्य

Green Park Cremation Ground - Noble Sparrows
Green Park Cremation Ground – Noble Sparrows

ये फोटोज अंतिम विदाई के भावुक माहौल को दिखाती हैं – परिवार के नम आँखें, मुखाग्नि, फूलों से सजा चिता और मौजूद लोगों का सम्मान। हरीश राणा के अंगदान (कॉर्निया और हार्ट वॉल्व) से कई लोगों को नई जिंदगी मिलने की उम्मीद है।

अगर आपको किसी खास फोटो पर ज़ूम, और डिटेल, या कोई और तस्वीर चाहिए तो बताएं। अलविदा हरीश राणा… आपकी कहानी अब भी कई सवाल और संवेदना जगाती रहेगी।

Sanjeevni Today
Author: Sanjeevni Today

Reporter

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