नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े हालातों के बीच भारत सरकार सतर्क हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस वैश्विक संकट को गंभीर बताते हुए कहा है कि आने वाला समय देश के लिए किसी बड़ी परीक्षा से कम नहीं होगा। उन्होंने इसे कोविड-19 महामारी जैसी चुनौती करार देते हुए सभी राज्यों से मिलकर काम करने की अपील की है।
प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में अपने संबोधन के दौरान संकेत दिए थे कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और इसका असर भारत पर भी पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि जैसे देश ने कोरोना महामारी के दौरान केंद्र और राज्यों के समन्वय से हालातों का सामना किया था, उसी तरह अब भी एकजुट होकर काम करने की जरूरत है।
इसी कड़ी में प्रधानमंत्री ने कल सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इस बैठक में ईरान से जुड़े संकट, संभावित आर्थिक प्रभाव, तेल आपूर्ति, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और आपातकालीन तैयारियों जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। सरकार का फोकस यह सुनिश्चित करने पर है कि किसी भी वैश्विक उथल-पुथल का देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता पर कम से कम असर पड़े।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में विदेशों में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और उनकी संभावित वापसी की रणनीति पर भी विचार किया जाएगा। साथ ही, पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति और कीमतों पर पड़ने वाले असर को लेकर भी चर्चा हो सकती है, क्योंकि मध्य पूर्व क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख केंद्र है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान से जुड़ा संकट और गहराता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक बाजारों और तेल कीमतों पर पड़ेगा, जिससे भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। ऐसे में केंद्र सरकार पहले से ही तैयारी के मोड में नजर आ रही है।
प्रधानमंत्री मोदी का यह बयान और मुख्यमंत्रियों के साथ प्रस्तावित बैठक इस बात का संकेत है कि सरकार किसी भी संभावित संकट से निपटने के लिए समन्वित रणनीति अपनाना चाहती है। उन्होंने दोहराया कि यह समय राजनीति का नहीं, बल्कि एकजुट होकर देशहित में काम करने का है।
देशभर में इस बैठक को लेकर खासा ध्यान है, क्योंकि इससे यह तय होगा कि भारत आने वाले दिनों में इस वैश्विक संकट का सामना किस तरह करेगा। सरकार की कोशिश है कि समय रहते सभी जरूरी कदम उठाए जाएं, ताकि देश सुरक्षित और स्थिर बना रहे।







