पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने बढाई जेके लक्ष्मीपत यूनिवर्सिटी के लॉरिएट अवॉर्ड 2018 की शोभा

 
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने बढाई जेके लक्ष्मीपत यूनिवर्सिटी के लॉरिएट अवॉर्ड 2018 की शोभा

जयपुर। देश की बेहतरीन यूनिवर्सिटीज में से एक जेके लक्ष्मीपत यूनिवर्सिटी ने उन विलक्षण प्रतिभावोँ को सम्मानित किया जिन्होने वर्ष 2014 सेलेकर अब तक समाज और देश के कल्याण हेतु बेहतरीन योगदान दिया है। 3 अक्टूबर 2018 को महापुरा, जयपुर स्थित यूनिवर्सिटी के कैम्पस में आयोजित कार्यक्रम में यहवैयक्तिक प्रतिष्ठा सम्मान प्रदान किया गया। लाखोँ लोगोँ के प्रेरणा स्रोत, भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को भी जनसेवा, शासन प्रणाली और देश के निर्माण में बेहतरीनयोगदान के लिए जेके लक्ष्मीपत यूनिवर्सिटी द्वारा लॉरिएट अवॉर्ड 2018 से नवाजा सम्मानित किया गया।

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प्रणब मुखर्जी ने 5वेँ हरी शंकर सिंघानिया मेमोरियल ओरेशन के तहत ‘यूथ एंड नेशन बिल्डिंग” विषय पर अपने विचार रखे इस अनोखे सेगमेंट की शुरुआत जेकेएलयू के पहले चांसलर हरी शंकर सिंघानिया की याद में की गई है। दीप प्रज्जवलन और सरस्वती वंदना से इस कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया और फिर कार्यक्रमोँ की शृन्खला शुरू हुई सबसे पहले जेकेएलयू के वाइस चांसलर डॉ. आर.एल. रैनाने स्वागत अभिभाषण दिया, उसके बाद चांसलर की अगुवाई में एक प्रस्तुति दी गई जिसमेँ जानी-मानी हस्तियोँ की मौजूदगी में इस लॉरिएट अवॉर्ड एवम हरी शंकर सिंघानिया मेमोरियल ओरेशन के पीछे के तर्क और विचारोँ का परिचय दिया गया। अगले सत्र के दौरान उन हस्तियोँ की अचीवमेंट के बारे में बताया गया जिन्हेँ यहाँ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

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भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने जेकेएलयू लॉरिएट अवॉर्ड की बेहद प्रशंसा की, जो कि युवाओँ और शिक्षा के क्षेत्र प्रोत्साहन दे रहा है, उन्होने कहा कि, भारत दुनिया का सबसे युवा देश है जहाँ 65% आबादी 35 साल की आयु से कम की है। इस जनसंख्या को लाभकर बनाने, ताकि यह जनसंख्या सम्बंधी डिजास्टर न साबित हो, यह बेहद जरूरी हैकि युवाओँ को उपयुक्त शिक्षा और प्रशिक्षण हासिल हो। उन्होने ऐसी शिक्षा की जरूरत पर बल दिया जो “रोजगार परक कौशल” विकसित करने वाली हो, इस मामले में महात्मागांधी, स्वामी विवेकानंद, पंडित जवाहरलाल नेहरू और रबिंद्रनाथ टैगोर के विचारोँ पर प्रकाश डालते हुए मुखर्जी ने बताया कि किस तरह से उन्होने भारत को लोगोँ के एक ऐसे समूह के रूप में देखा जो 120 अलग- अलग भाषाएँ और 1600 बोलियाँ बोलते हैं, 7 प्रमुख धर्मोँ को मानने वाले हैं और इतिहास में झांककर देखेँ तो किस प्रकार से अलग-अलग जगहोँसे आकर यहाँ एक-दूसरे के साथ जुड गए हैं।

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भारत जैसे एक देश के लिए राष्ट्र की परिभाषा संकीर्ण नहीं हो सकती है, इसे राष्ट्र के युरोपियन क्लसिफिकेशन में नहीं ढूंढा जा सकताहै, जिसका उदय 1648 में ट्रीटी ऑफ वेस्ट्फालिया से हुआ। बल्कि इसका सार सबसे बेहतरीन ढंग से एक वाक्य ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के जरिए पेश किया जा सकता है, जिसकामतलब है, पूरा विश्व मेरा राष्ट्र है। यह मात्र एक शब्द नहीं बल्कि वह विचार है जिसे अपनाकर हमारी युवा पीढी को वे आध्यात्मिक और बौद्धिक दोनोँ रूपोँ में विकसित होते देखनाचाहते थे। उन्होने आगे कहा कि व्यक्ति ही विकास का केंद्र बिंदु है और भारतीय सभ्यता की जडेँ बेहद मजबूत हैं और अपने सहभागी इतिहास की वजह से भविष्य के नेताओँ मेंइतनी क्षमता और मजबूती है कि वे अपने देश को और सशक्त बना सकेँ।

मुखर्जी ने अपने अभिभाषण का समापन उन युवा दर्शकोँ की प्रशंसा के साथ किया जो “अपनी दुनियास्वयँ रचते हैं” कुछ इस तरह से कि “पूरी दुनिया उन्हेँ हाथोँहाथ लेने को तैयार होती है।“ जेकेएलयू के चांसलर श्री भारत हरी सिंघानिया ने इस मौके पर अपने विचार व्यक्त किएऔर कहा कि, “भारत का युवा आविष्कारोँ को अपनाकर और रोजगार के रूप में उद्यमिता को चुन कर देश की अर्थव्यवस्था में काफी बडे स्तर पर योगदान दए रहा है। जेके लक्ष्मीयूनिवर्सिटी की स्थापना वर्सः 2011 में हुई थी जिसका यह उद्देश्य है गुणवत्ता-आधारित उच्च शिक्षा उपलब्ध कराना। उच्च शिक्षा और रिसर्च के क्षेत्र में एक आविष्कारी संस्थानबनाने के लिए इसके चयनित क्षेत्रोँ में यूनिवर्सिटी दुनिया भर में अपने अकादमिक और रिसर्च एजेंडा को आगे बढा रही है। देश के निर्माण में सहायक योग्य रोजगारपरक युवाओँ कोतैयार करने के साथ-साथ यूनिवर्सिटी युवाओँ को सामाजिक सेवा के लिए भी प्रेरित करती है। इसके लिए उन्हेँ सरकार द्वारा शुरू किए गए तमाम महत्वपूर्ण अभियानोँ से उन्हेँ जोडाजाता है और उसमें अपना बेहतरीन सहयोग देने के लिए प्रेरित किया जाता है।

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जेकेएलयू के चांसलर भारत हरी सिंघानिया ने इस मौके पर अपने विचार व्यक्त किए और कहा कि, “भारत का युवा आविष्कारोँ को अपनाकर और रोजगार के रूप में उद्यमिता को चुन कर देश की अर्थव्यवस्था में काफी बडे स्तर पर योगदान दए रहा है। जेके लक्ष्मी यूनिवर्सिटी की स्थापना वर्सः 2011 में हुई थी जिसका यह उद्देश्य है गुणवत्ता-आधारित उच्च शिक्षा उपलब्ध कराना। उच्च शिक्षा और रिसर्च के क्षेत्र में एक आविष्कारी संस्थान बनाने के लिए इसके चयनित क्षेत्रोँ में यूनिवर्सिटी दुनिया भर में अपने अकादमिक और रिसर्च एजेंडा को आगे बढा रही है। देश के निर्माण में सहायक योग्य रोजगारपरक युवाओँ को तैयार करने के साथ-साथ यूनिवर्सिटी युवाओँ को सामाजिक सेवा के लिए भी प्रेरित करती है। इसके लिए उन्हेँ सरकार द्वारा शुरू किए गए तमाम महत्वपूर्ण अभियानोँ से उन्हेँ जोडा जाता है और उसमें अपना बेहतरीन सहयोग देने के लिए प्रेरित किया

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