*दिल्ली दरबार* महोत्सव में शास्त्रीय संगीतकारों ने जीता दर्शकों का दिल

 
*दिल्ली दरबार* महोत्सव में शास्त्रीय संगीतकारों ने जीता दर्शकों का दिल

नई दिल्ली। दिल्ली घराना द्वारा सुर सागर सोसाइटी, अमीर खुसरो इंस्टीट्यूट ऑफ म्यूजिक और डीजी प्रोडक्शंस के सहयोग से इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में आयोजित ‘दिल्ली दरबार’ के पहले दिन शानदार शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिय़ा। 

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इस मौके पर दिल्ली दरबार के संस्थापक और दिल्ली घराने के खलीफा उस्ताद इक़बाल अहमद खान ने कहा, “मुझे भारतीय शास्त्रीय कला के महानतम उस्तादों की छत्रछाया में संगीत सीखने का बहुत बड़ा सौभाग्य प्राप्त हुआ। 

उन्होंने न केवल हमें कला सिखाई बल्कि भारत की महान संस्कृति और परंपराओं से हमारी मुलाकात भी करवाई। मैं दिल्ली घराने का खलीफा हूं और झंडाबरदार भी। इस नाते महसूस करता हूं कि यह मेरी जिम्मेदारी है कि मैं अब युवा पीढ़ी को राष्ट्र की शास्त्रीय कला और संस्कृति से जोड़ने की एक कोशिश करूं, उनकी संवेदनाओं को निखारूं और हमारी कला और संस्कृति से उनको आशना करूं।

दिल्ली दरबार महोत्सव का उद्घाटन उस्ताद इकबाल अहमद खान, उस्ताद वसीफुद्दीन डागर (ध्रुपद उस्ताद), दिल्ली की पर्यटन सचिव मनीषा सक्सेना, केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय की अतिरिक्त महानिदेशक मीनाक्षी शर्मा आदि गण्यमान्य अतिथियों की उपस्थिति में किया गय़ा।

इसके बाद एक पैनल डिस्कशन हुआ, जिसका विषय ‘अ होमलेस आर्ट फॉर्म’ था। इस चर्चा में वरिष्ठ पत्रकार सुआंशु खुराना, उस्ताद वसीफुद्दीन डागर और मीनाक्षी शर्मा शामिल हुए। 

दिल्ली दरबार की सह-संस्थापक और डीजी प्रोडक्शंस की प्रबंध निर्देशक वुसात इकबाल खान कहतीं हैं, “दिल्ली दरबार शुरू करने का विचार इस तथ्य से भी उत्पन्न हुआ कि आज देश में कई युवा संगीत के नाम पर कोलाहल का घातक कॉकटेल सुनते हैं जो कि सच्चे संगीत से उतना ही दूर है, जितना दिन से रात हो। 

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यह संगीत के मूल सिद्धांतों का पालन नहीं करता है, ना ही भारतीय है, ना पश्चिमी। इसलिए हम भारत के नौजवानों को एक बार फिर सच्चे भारतीय संगीत के साथ परिचय कराना और जोड़ना चाहते थे। हमें उम्मीद है कि हम अपनी इस पहल से कम से कम एक छोटा सा बदलाव कर पाएंगे।

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