राजस्थान में अब मुर्गीपालन व्यवसाय को संक्रमण से बचाने की कवायद

 


जयपुर। राजस्थान के 17 जिलों में बर्ड फ्लू के संक्रमण की दहशत के बीच अब प्रदेश के मुर्गीपालन व्यवसाय को बचाने की कवायद शुरू हो गई है। पक्षियों की असामान्य मौतों के बाद उनमें मिल रहे एवियन इन्फ्लूंएजा का संक्रमण थम तो गया हैं, लेकिन इससे मुर्गीपालन व्यवसाय को किसी तरह खतरा पैदा नहीं हो, इसके लिए पशुपालन विभाग संक्रमित जिलों में विशेष सावधानी बरत रहा हैं। राज्य के 27 जिलों में अबतक 6595 पक्षी असामान्य मौतों का शिकार हो चुके हैं, जबकि इन जिलों के 272 नमूनों में से 17 जिलों के 67 नमूनों मेें एवियन इन्फ्लूएंजा का संक्रमण माना जा चुका हैं। 

राज्य में पक्षियों की असामान्य मौतों का सिलसिला रविवार को भी नहीं थमा। प्रदेश में रविवार को 145 पक्षी मृत मिले। इनमें 112 कौएं, 5 मोर, 11 कबूतर तथा 17 अन्य पक्षी शामिल रहे। इन्हें मिलाकर अब तक प्रदेश के 27 जिलों में 6595 पक्षी दम तोड़ चुके हैं। पशुपालन विभाग ने प्रदेश के पोल्ट्री फार्म से 1986 सैम्पल्स क्षेत्रीय रोग निदान प्रयोगशाला (नॉर्थ जोन) जालंधर तथा प्रवासी व वन्य पक्षियों के 724 ड्रोपिंग सैम्पल्स एकत्र कर राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशुरोग संस्थान भोपाल को भेजे हैं, जहां से अबतक रिपोर्ट नहीं आ पाई हैं। पशुपालन विभाग के अनुसार एवियन इन्फ्लुएंजा (बर्ड फ्लू) के संक्रमण की जद में अब तक 17 जिले जयपुर, दौसा, सवाई माधोपुर, हनुमानगढ़, जैसलमेर, पाली, सिरोही, कोटा, बारां, झालावाड़, बांसवाड़ा, चित्तौडगढ़़, टोंक, करौली, प्रतापगढ़, झुंझुनूं व भीलवाड़ा आ चुके हैं। भोपाल की रेफरल लैब से इन जिलों में मृत पाए गए पक्षियों के सैम्पल्स की जांच रिपोर्ट में बर्ड फ्लू का संक्रमण माना गया हैं।

पक्षियों की असामान्य मौतों का सिलसिला सर्वप्रथम राज्य के झालावाड़ जिले में प्रारंभ हुआ था। यहां कौओं की असामयिक मौतों के बाद विभिन्न जिलों में पक्षियों की मौतें होने का सिलसिला शुरू हुआ, जो अब तक जारी है। प्रदेश में 25 दिसम्बर से लेकर रविवार तक 4640 कौएं, 380 मोर, 553 कबूतर तथा 1022 अन्य पक्षी असामयिक मृत्यु को प्राप्त हो चुके हैं। भोपाल की रेफरल लैब से राज्य के 10 जिलों की रिपोर्ट नेगेटिव आ चुकी हैं। इनमें अलवर, सीकर, नागौर, भरतपुर, बीकानेर, चूरु, श्रीगंगानगर, जोधपुर, बाड़मेर, जालोर जिला शामिल हैं। 

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