राजस्थान: पूर्व वित्त मंत्री सुराणा का निधन, मुख्यमंत्री समेत कई नेताओं ने जताई संवेदना

 


जयपुर। राजस्थान के पूर्व वित्त मंत्री मानिक चंद सुराणा का बुधवार सुबह जयपुर में निधन हो गया। वे पहले कोरोना से पीडि़त थे, लेकिन ठीक हो गए। इसके बाद उनका स्वास्थ्य दोबारा खराब हुआ, जिसमें सुधार नहीं हुआ। उनका अंतिम संस्कार गुरुवार को बीकानेर में होगा। सुराणा के निधन पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत समेत कई नेताओं ने संवेदना प्रकट की है।

मुख्यमंत्री ने बुधवार सवेरे ट्वीट कर सुराणा के राजस्थान में दिए गए योगदान को याद किया। मुख्यमंत्री गहलोत ने लिखा कि राजस्थान के पूर्व वित्त मंत्री माणिक चंद सुराणा जी के निधन पर मेरी गहरी संवेदनाएं। 

उल्लेखनीय है कि सुराणा का जयपुर में उपचार चल रहा था। कोरोना संक्रमित होने के बाद उन्हें 29 अक्टूबर को जयपुर के आरयूएचएस में भर्ती कराया गया था, जहां उनकी रिपोर्ट नेगेटिव आ गई, लेकिन तबीयत में सुधार नहीं होने के चलते उन्हें अस्पताल में ही रखा गया। इसके बाद उन्हें सवाई मानसिंह अस्पताल में शिफ्ट किया गया। 90 साल के सुराणा लूणकरणसर से आखिरी बार 2013 में विधायक रहे। सुराणा पांच बार विधानसभा के सदस्य रहे। अब तक वे तीसरी, छठीं, आठवीं, 11वीं व 14वीं विधानसभा में सदस्य रहे। 2014 में उन्हें विधानसभा द्वारा सर्वश्रेष्ठ विधायक चुना गया। सुराणा अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ कर गए हैं। पिछले दिनों उनकी पत्नी का भी निधन हो गया था।

79 साल के मानिक चंद सुराणा का जन्म 31 मार्च 1931 को हुआ था। छात्र जीवन से ही राजनीति करने वाले सुराणा ने डूंगर कालेज के अध्यक्ष पद पर चुनाव जीतकर अपनी राजनीति शुरू की थी। वे राजस्थान के वित्त मंत्री और वित्त आयोग के अध्यक्ष भी रहे। जनता पार्टी से साल 1977 में लूणकरनसर से पहली बार विधायक बने, इसके बाद 1985 में विधायक रहे। सुराणा ने इसके बाद मूल जनता दल को छोड़ते हुए जनता दल प्रगतिशील का गठन किया। बाद में इस पार्टी का भाजपा में विलय कर दिया गया।

सुराणा 77 से 80 तक भैरोंसिंह शेखावत के मुख्यमंत्री काल में वित्त मंत्री रहे थे। पार्टी में भाजपा के विलय के बाद सुराणा ने वर्ष 2000 में तत्कालीन विधायक भीमसेन चौधरी के निधन के बाद उपचुनाव में उनके बेटे वीरेंद्र बेनीवाल को हराया था। सुराणा ने इसके बाद भाजपा छोड़ दी। वे 2013 में टिकट नहीं मिलने से नाराज थे। उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत गए। हालांकि कांग्रेस के खिलाफ ही रहे। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने उन्हें वित्त आयोग का अध्यक्ष बनाया था।

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