केन्द्रीय शिक्षा मंत्री ने किया स्पष्ट, आरक्षण की व्यवस्था को जारी रखेगी नई शिक्षा नीति

 


नई दिल्ली। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 में देश के शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण के प्रावधान को कमजोर करने संबंधी अटकलों को खारिज करते हुए केन्द्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान में निहित आरक्षण की व्यवस्था को नई शिक्षा नीति जारी रखेगी। 

केन्द्रीय मंत्री निशंक ने एक पत्र के माध्यम से उन मीडिया रिपोर्ट्स का खंडन किया जिसमें यह प्रश्न उठाया गया कि क्या एनईपी 2020 के तहत भारतीय संविधान द्वारा प्रतिष्ठापित आरक्षण की नीति को जारी रखा जाएगा। निशंक ने कहा कि इस लेख के कारण उनके कुछ राजनीतिक मित्र यह आशंका व्यक्त कर रहे हैं कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 शायद देश की शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण के प्रावधान को कमज़ोर कर सकती है।

उन्होंने कहा कि यह नीति भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में प्रतिष्ठापित आरक्षण के संवैधानिक जनादेश द्वारा अनुमोदित है। मेरा मानना है कि एनईपी-2020 में आरक्षण के प्रावधानों की इसके अतिरिक्त पुनरावृत्ति किए जाने की आवश्यकता नहीं है, जिसके तहत पहले से ही भारतीय संविधान के ढांचे के अंतर्गत काम किया जा रहा है।

उन्होंनेे कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति की घोषणा के बाद विभिन्न प्रवेश परीक्षाएं जैसे जेईई, एनईईटी, यूजीसी-एनईटी, इग्नू- आयोजित की गईं और शैक्षणिक संस्थानों में नियुक्ति की कई प्रक्रियाएं भी हुईं, लेकिन हमें अब तक आरक्षण के प्रावधान को कमजोर करने से संबंधित एक अकेली शिकायत भी नहीं मिली। एनईपी की घोषणा के 4-5 महीने बाद बगैर किसी तथ्य के इस तरह की आशंकाओं को उठाए जाने का अर्थ समझना कठिन है। मैं फिर से दोहराता हूं कि सफलतापूर्वक चल रहे कार्यक्रम और नीतियां एसी, एसटी, ओबीसी और सामाजिक-आर्थिक रूप से कमजोर दूसरे वर्गों के शैक्षणिक समावेश के लिए किए जाने वाले नए प्रयासों के साथ लगातार जारी रहेंगे। मैं यह एकदम स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि अगर इस संबंध में हमें किसी भी तरह की शिकायत मिलती है, तो मेरा मंत्रालय उस पर यथोचित कार्रवाई करेगा।

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