शिक्षा का केन्द्र समाज में शुरू करना सदा सर्वदा सर्वत्र की आवश्यकता : मोहन भागवत

 
शिक्षा का केन्द्र समाज में शुरू करना सदा सर्वदा सर्वत्र की आवश्यकता : मोहन भागवत


मथुरा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि आत्मनिर्भर भारत के लिए शिक्षा अत्यन्त जरूरी है। देश की महिला वर्ग को शिक्षा की सबसे अधिक जरूरत है। एक महिला के शिक्षित होने से उसकी सभी संतानें शिक्षित होंगी। उन्होंने कहा कि मनुष्य की पहली शिक्षक मां है, उसका शिक्षित होना बहुत आवश्यक है। डॉ. मोहन भागवत ने यह बात बुधवार दोपहर को ब्रजप्रांत में अपने प्रवास के तीसरे दिन केशव धाम स्थित रामकली देवी सरस्वती बालिका विद्या मंदिर के नवीन भवन के लोकार्पण अवसर पर कही। 

तीन दिवसीय प्रवास के अंतिम दिन आज केशवधाम में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि शिक्षा आदमी के जीवन का अविभाज्य अंग है। जीवन की जो आवश्यकता हम  मानते हैं उसमें स्वास्थ्य, अन्न और शिक्षा है। सबसे प्रमुख शिक्षा का केंद्र समाज में शुरू करना है, ये समाज में सदा सर्वदा सर्वत्र की आवश्यकता है। इसे पूर्ण करना अत्यंत समाज उपयोगी है, जो धर्म का काम है। ये अत्यन्त समाज उपयोगी होना ही 11 धर्मों का काम है। धर्म, पूजा करने में नहीं होता है। धर्म समाज को जोड़ने और समाज को आगे ले जाने में होता है। शिक्षा इसके लिए आवश्यक संस्कार प्रदान करती है। संघ प्रमुख डॉ. भागवत ने कहा कि शिक्षा रोजगारपरक होनी चाहिए। वो धर्म, समाज को जोड़ने और उन्नत करने के साथ आगे ले जाने में आवश्यक संस्कृति प्रदान करती है। धर्म में यह कहा गया है कि रोजगारपरक शिक्षा तो होनी ही चाहिए। शिक्षा प्राप्त करने वाले व्यक्ति का इतना आत्मविश्वास भी होना चाहिए कि वो अपने परिवार का पालन पोषण करते हुए समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को पूरा कर सके। इसलिए उन बातों को  रखकर ही उसका रोजगारपरक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यक्ति का स्वयं पर निर्भर होना उसके ज्ञान पर निर्भर करता है। शिक्षा व्यक्ति का भाग्य बदल देने वाली हो तथा उसके मन में स्वदेश के प्रति भक्ति पैदा करने वाली हो। उसका हृदय स्वजनों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। 
 
संघ प्रमुख ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत बनाना है तो हम कौन, हमारी क्षमता आज क्या है, हमारी आवश्यकता क्या, आज की स्थिति क्या है। आज के विश्व में सम्पन्न देश बनना है तो ऐसी कीर्ति और समझदारी देने वाली शिक्षा विद्याभारती के विद्यालय में मिलती है तो फिर अच्छी शिक्षा के लिए अलग देश में जाने की आवश्यकता नहीं है। विश्व में कुछ अलग देखने की आवश्यकता नहीं है, यह सब हमारे भारत में है। इंग्लैंड की शिक्षा अच्छी है, यह ठीक है लेकिन इंग्लैंड में ऐसी शिक्षा कहां से आई। उन्होंने इग्लैंड के गोल मेज सम्मेलन में भाग लेने गए गांधी जी का हवाला देते हुए बताया कि गांधी जी ने कहा था कि अंग्रेजों ने हमारे देश को बहुत लूटा है तो उसका विरोध हुआ। हमारी शिक्षा पद्धति सभी को रोजगार देती थी। ऐसी शिक्षा को ही अंग्रेज इग्लैंड लेकर गए, जिससे उनकी साक्षरता 70 प्रतिशत हो गई। जबकि उन्होंने अपनी शिक्षा प्रणाली को हमारे ऊपर थोप दिया जिसके कारण हमारी ये स्थिति हो गई है। इससे पूर्व कार्यक्रम में वेलमेट इंडिया लिमिटेड के निदेशक दिनेश चंद्र अग्रवाल ने संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत का अभिनंदन किया। केशवधाम समिति के अध्यक्ष जीएलए विश्वविद्यालय के कुलाधिपति नारायण अग्रवाल ने आभार व्यक्त किया।

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत सोमवार की शाम उत्तर प्रदेश के मथुरा में आए थे। सोमवार रात उन्होंने बृज प्रांत के 44 पदाधिकारियों के साथ राम मंदिर निर्माण के लिए चलाए जा रहे निधि समर्पण अभियान, किसान आंदोलन, पश्चिम बंगाल चुनाव व अन्य मुद्दों पर मंथन किया। मंगलवार की शाम साधु-संतों के साथ भी मुलाकात की। साधु-संतों के साथ मुलाकात के बाद उन्होंने कहा था कि शाखा द्वारा व्यक्ति निर्माण तथा गतिविधियों के माध्यम से सामाजिक जीवन में परिवर्तन के लिए भी समाज को जोड़कर काम किया जाए। संघ के स्वयंसेवकों द्वारा संचालित गतिविधियों का प्रत्यक्ष आचरण हमारे परिवार, व्यवसाय, सामाजिक व व्यक्तिगत जीवन में प्रारंभ हो, ऐसा प्रयास किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढे़ और हरियाली और प्रकृति संरक्षण के लिए समाज में चेतना का प्रवाह हो, प्रकृति संरक्षण समाज-परिवार में आचरण बने, इसका भी प्रयास स्वयंसेवकों को करना है।

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