तेजपुर विवि के 18वें दीक्षांत समारोह को प्रधानमंत्री ने किया संबोधित- शोणितपुर-4, अंतिम

 


नई दिल्ली। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने हालात से समझौता करने की बजाय तेजी से फैसले लिये। प्रोएक्टिव होकर फैसले लिये। इसी का परिणाम है कि भारत वायरस से ज्यादा प्रभावित रूप से उबर पाया। प्रभावी रूप से लड़ पाया। मेड इन इंडिया सलूशन से हमने वायरस के फैलाव को कम किया। अपने हेल्थ इंफ्रा को बेहतर किया। अब हमारी वैक्सीन से जुड़ी रिसर्च और प्रोडक्शन की क्षमता भारत के साथ-साथ दुनिया के अनेक देशों को सुरक्षा कवच का विश्वास दे रही है। अगर हम अपने वैज्ञानिकों को, अपने रिसर्च, अपने स्कॉलर्स, अपने साइंटिस्ट, अपनी इंडस्ट्री की ताकत पर भरोसा ना करते तो क्या यह सफलता संभव हो पाती। सिर्फ हेल्थ सेक्टर ही क्यों, हमारा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर ही लीजिए। अगर हम भी यह मान कर बैठ जाते कि भारत लिटरेसी के अभाव में डीबीटी डायरेक्ट ट्रांसफर और डिजिटल लेनदेन संभव नहीं है तो क्या कोरोना जैसे संकट में सरकार गरीब से गरीब तक इस प्रभावी ढंग से पहुंच पाती। आज फिनटेक में, डिजिटल इंक्लूजन में हम दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हैं। वह क्या कभी संभव हो पाता। आज का भारत समस्या के समाधान के लिए एक्सपेरिमेंट से भी नहीं डरता और बड़े स्केल पर काम करने से पीछे नहीं हटता।

सबसे बड़ा बैंकिंग इंक्लूजन अभियान भारत में हो रहा है। टॉयलेट बनाने का सबसे बड़ा अभियान भारत में, हर गरीब परिवार को घर देने का अभियान भारत में, घर-घर जल पहुंचाने का सबसे बड़ा अभियान भारत में, सबसे बड़ी हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम भारत में और सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान भी भारत में। इन सब का बहुत बड़ा लाभ नॉर्थ ईस्ट को हुआ है। असम के लोगों को हुआ है। ऐसे कार्यक्रम तभी चल सकते हैं जब देश और समाज आत्मविश्वास से भरा हो। देश यथास्थिति को बदलने के लिए, इनोवेट करने के लिए पूरी शक्ति लगा रहा हो। आज जिस प्रकार दुनिया में भारत की नई टेक्नोलॉजी का प्रचार हो रहा है, उससे हर क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा हो रही हैं। आज हम बिना ब्रांच के बैंक, बिना शोरूम के रिटेल बिजनेस, बिना डाइनिंग रूम के क्लाउड किचन ऐसे अनेक प्रयोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में देख रहे हैं। ऐसे में यह भी संभव है कि भविष्य की यूनिवर्सिटी पूरी तरह से वर्चुअल हो और दुनिया भर से स्टूडेंट, फैकेल्टी किसी भी यूनिवर्सिटी का हिस्सा बन सकते हैं।  इस प्रकार के ट्रांसफॉरमेशन के लिए हमारे पास एक जरूरी रेगुलेटरी फ्रेमवर्क होना जरूरी है। नई एजुकेशन पॉलिसी में लगातार उसकी कोशिश की जा रही है। इस पॉलिसी में टेक्नोलॉजी के ज्यादा से ज्यादा उपयोग हो। मल्टीडिसीप्लिनरी एजुकेशन और फ्लैक्सिबिलिटी को प्रोत्साहित किया जा रहा है। नई एजुकेशन पॉलिसी इसके लिए हमारे एजुकेशन सिस्टम को तैयार करने पर बल देती है। इसकी मदद से एडमिशन से लेकर अंत तक पूरी प्रक्रिया बेहतर हो जाएगी। मुझे विश्वास है नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के लक्ष्य को पाने में भूमिका निभाएगी। मुझे तेजपुर यूनिवर्सिटी में एक रिकॉर्ड और उसके सामर्थ्य़ पर पूरा भरोसा है।

प्रधानमंत्री ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि जब आपका फॉर्मल एजुकेशन पूरा होता है तो आप अपने भविष्य के साथ ही राष्ट्र के भविष्य के लिए काम करें। आप एक बात याद रखें अगर आपको लक्ष्य तक पहुंचना है तो आपके जीवन में उतार-चढ़ाव से उतना असर नहीं पड़ेगा। आपके जीवन के आने वाले 25 से 26 साल आपके कैरियर के साथ-साथ देश के भाग्य को भी तय करने वाले हैं। मुझे विश्वास है आप सभी देश को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाएंगे। उन्होंने कहा कि 2047 में जब देश आजादी का 100 साल मना रहा होगा तो यही 25-26 साल का कालखंड आपके योगदान से, आपके पुरुषार्थ से आपके सपनों से भरा हुआ होगा। कल्पना कीजिए कि आजादी के शतक में आपका 25 साल कितनी बड़ी भूमिका पैदा करेगा। आइए हम सब अपने सपनों को सच करने के लिए चल पड़ें। संकल्प के साथ चल पड़ें। सपनों को लेकर चल पड़ें। सिद्धि पाने के मकसद से चल पड़ें। देखिए जीवन सफलताओं की एक-एक ऊंचाइयों को पार कर जाएगा।

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