आम आदमी पार्टी के तीन विधायकों को बरी करने का आदेश

 


नई दिल्ली। दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने 2017 में दिल्ली विधानसभा परिसर में एक महिला के साथ बदसलूकी और हाथापाई करने के मामले में आम आदमी पार्टी के तीन विधायकों को बरी करने का आदेश दिया है। एडिशनल चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने विधायकों जरनैल सिंह, अमानतुल्लाह खान और सोमनाथ भारती को बरी करने का आदेश दिया।

यह घटना 28 जून 2017 की है। एक महिला ने दिल्ली पुलिस से शिकायत की कि उसे तीनों विधायकों ने विधानसभा परिसर में गाली गलौच करते हुए धक्का दिया। उसे घसीटते हुए एक कमरे में बंद कर दिया गया। महिला की शिकायत पर सिविल लाईंस पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 323, 342, 354, 354ए (1), 509 और 34 के तहत एफआईआर दर्ज की थी। महिला के मुताबिक वो 28 जून 2017 को दिल्ली विधानसभा की कार्यवाही देखने गई थी, लेकिन उसे विजिटर्स गैलरी का पास नहीं मिल सका। करीब पौने तीन बजे जब वह विधानसभा के बाहर खड़ी थी तो जरनैल सिंह अपने कुछ लोगों के साथ उसकी ओर दौड़े और उसे धक्का दे दिया। बाद में उसे एक कमरे में ले जाया गया जहां पहले से दो लोग मौजूद थे। जरनैल सिंह ने अपने लोगों से कहा था कि ये वही महिला है जिसने आप नेता संजय सिंह पर थप्पड़ चलाया था। उसे कमरे में धक्का देकर बंद कर दिया गया।

महिला के मुताबिक जरनैल सिंह के साथ अमानतुल्लाह खान भी मौजूद थे। महिला ने दोनों विधायकों पर छेड़खानी करने का आरोप लगाया। इस बीच वहां विधायक सोमनाथ भारती भी आ गए और उन्होंने गाली-गलौच किया और उसे धक्का देते हुए एक कमरे में ले जाकर बंद कर दिया। कोर्ट ने कहा कि महिला ने एफआईआर में समय टाइप कराकर पुलिस से शिकायत की थी। महिला ने कोर्ट में जो बयान दर्ज कराया उसमें और एफआईआर के बयान में विरोधाभास है। टाइप किए हुए शिकायत में अमानतुल्लाह खान पर छाती पर मारने का आरोप है। जबकि मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए बयान में महिला ने अमानतुल्लाह खान और जरनैल सिंह पर उसे इज्जत लूटने की नीयत से छाती पर हमला करने का आरोप लगाया था। टाइप किए हुए शिकायत में महिला ने कहा है कि उसे कमरे में एक घंटे बंद दिया गया था जबकि कोर्ट में मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए बयान में कहा था कि उसे दो घंटे कमरे में बंद कर रखा गया था। घटना के दिन जब जांच अधिकारी अस्पताल पहुंचा तो महिला ने बयान देने से इनकार कर दिया। ये तब था जबकि एमएलसी रिपोर्ट में कहा गया था कि शिकायतकर्ता अपना बयान देने के लिए फिट थी। कोर्ट ने पाया कि महिला तीनों आरोपियों को पहचानती थी उसके बावजूद उसने एमएलसी में किसी का नाम नहीं लिया।

कोर्ट ने कहा कि महिला ने 3 सितंबर 2020 को अपना पूरक बयान दर्ज कराया जिसमें उसने कहा कि गवाह जगदीप राणा घटनास्थल पर मौजूद था। महिला ने कहा कि राणा चश्मदीद गवाह है। शिकायतकर्ता महिला ने 3 सितंबर 2020 के पहले जगदीप राणा का नाम कभी नहीं लिया। पुलिस को दिए बयान में जगदीप राणा ने कहा कि वह शिकायतकर्ता को अन्ना आंदोलन के समय से जानता था। महिला ने मजिस्ट्रेट के सामने दिए बयान में कहा कि घटना के बाद पुलिस और डॉक्टर घटनास्थल पर पहुंची और उसे अस्पताल पहुंचाया गया। लेकिन अभियोजन ने कभी भी किसी डॉक्टर या पुलिसकर्मी को गवाह नहीं बनाया और न ही उनका बयान दर्ज किया। कोर्ट ने कहा कि महिला ने कहा कि वह विधानसभा की कार्यवाही देखने गई थी लेकिन विधानसभा के रिसेप्शन पर ऐसा कोई वाकया दर्ज नहीं था। 

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