मराठा आरक्षण : सुनवाई फिजिकल होगी या वीडियो कांफ्रेंसिंग से, सुप्रीम कोर्ट 5 फरवरी को करेगा विचार

 


नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की संविधान बेंच मराठा आरक्षण के मसले पर 25 जनवरी से सुनवाई नहीं करेगी। बुधवार को महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने 25 जनवरी से सुनवाई स्थगित करने की मांग की। उनकी मांग का वकील कपिल सिब्बल ने भी समर्थन किया। इस मामले में सुनवाई कब और किस मोड पर होगी इस पर सुप्रीम कोर्ट 5 फरवरी को विचार करेगा। 

सुनवाई के दौरान मुकुल रोहतगी ने 25 जनवरी को सुनवाई टालने की मांग की। उन्होंने कहा कि बुजुर्ग वकीलों को कोरोना का वैक्सीन लेने में छह से आठ हफ्ते का समय लग सकता है। उसके बाद मेरे जैसे वकील कोर्ट में पेश हो सकते हैं। उन्होंने इस मामले की फिजिकल कोर्ट में सुनवाई की मांग की। रोहतगी की इस दलील का कपिल सिब्बल ने समर्थन किया। उसके बाद कोर्ट ने 25 जनवरी की सुनवाई स्थगित करते हुए कहा कि 5 फरवरी को हम फैसला करेंगे कि सुनवाई फिजिकल होगी या वीडियो कांफ्रेंसिंग से। नौ दिसंबर 2020 को कोर्ट ने मराठा आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से लगे रोक के फैसले को वापस लेने से इन्कार कर दिया था। जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली इस बेंच में जस्टिस एल नागेश्वर राव, जस्टिस एस अब्दुल नजीर, जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस एस रविंद्र भट्ट शामिल हैं। 

सुप्रीम कोर्ट ने 9 सितंबर 2020 को महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण पर रोक लगाते हुए इस मामले को पांच जजों या उससे ज्यादा की संख्या वाली बेंच को विचार करने के लिए रेफर कर दिया था। 27 जून 2019 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने मराठा आरक्षण की वैधता को बरकरार रखा था, लेकिन इसे 16 प्रतिशत से कम कर दिया। बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार के 16 प्रतिशत आरक्षण को घटाकर शिक्षा के लिए 12 प्रतिशत और नौकरियों के लिए 13 प्रतिशत करते हुए यह पाया कि अधिक कोटा उचित नहीं था।

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