Live Updates/ 26 जनवरी की परेड पर एकमत नहीं किसान संगठन, विफल हो सकता है किसानों का प्लान

 


नई दिल्ली। तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन का आज 52वां दिन है। किसानों के इस शांत आंदोलन की ‘ताकत’ भी लगातार बढ़ती जा रही है। ठंड की परवाह किए बिना हरियाणा, पंजाब, यूपी, राजस्थान समेत अन्य राज्यों से किसानों के जत्थे रसद के साथ लगातार धरनास्थल पर पहुंच रहे हैं। इस बीच खबरे है कि 26 जनवरी की परेड को लेकर किसान संगठन एकमत नहीं हैं। 

इस बाबत कोई सर्वमान्य रणनीति नहीं बन पा रही है। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) के कुछ सदस्य चाहते थे कि गणतंत्र दिवस पर कानून के दायरे में रहते हुए बड़ा प्रदर्शन कर ट्रैक्टर परेड निकाली जाए। दूसरे राज्यों में परेड हो या नहीं, इसकी जिम्मेदारी लेने के लिए कोई तैयार नहीं हुआ। बाद में किसान नेता दर्शनपाल ने कहा, सभी राज्यों में ट्रैक्टर परेड निकालेंगे। पंजाब से जुड़े ज्यादातर किसान संगठन अपने तरीके से इस आंदोलन को आगे बढ़ाना चाह रहे थे, लेकिन उन्हें इसमें सफलता नहीं मिली। 

Live Updates/ 26 जनवरी की परेड पर एकमत नहीं किसान संगठन, विफल हो सकता है किसानों का प्लान

पंजाब के अनेक किसान नेता इस बात से खुश नहीं है कि संगठन से जुड़े लोग खुद को टीवी पर चमका रहे हैं। यूपी के किसान नेता राकेश टिकैत की आक्रामक शैली को लेकर भी कुछ संगठन असमंजस की स्थिति में रहते हैं। उस वक्त जब दूसरे किसान संगठन ट्रैक्टर रैली को लेकर नपे-तुले बयान दे रहे थे तो राकेश टिकैत ने खुलेआम यह घोषणा कर दी कि गणतंत्र दिवस पर सब कुछ होगा। ट्रैक्टर परेड निकाली जाएगी। किसान संगठनों की आपसी फूट से सरकार को बल मिला है। 

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने एक अंतरिम आदेश में अगले आदेश तक नए कृषि कानूनों के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी थी और शिकायतों को सुनने तथा गतिरोध के समाधान पर अनुशंसा करने के लिए चार सदस्यीय समिति का गठन किया था। समिति में भारतीय किसान यूनियन के भूपेंद्र सिंह मान, अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति शोध संस्थान के दक्षिण एशिया के निदेशक डॉ. प्रमोद कुमार जोशी, कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी और शेतकारी संगठन के अध्यक्ष अनिल घानावत शामिल हैं। हालांकि मान ने 14 जनवरी को खुद को समिति से हटा लिया था। 

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