kisan andolan: ट्रैक्टर रैली का आज रूट तय करें किसान, UP, उत्तराखंड से इतने हजार ट्रैक्टर लेंगे हिस्सा

 


गाजियाबाद। किसानों के आंदोलन का आज 60वां दिन है। यानी किसान आंदोलन को शुरू हुए ठीक दो महीने आज पूरे हो जाएंगे। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने शनिवार को कहा है कि 26 जनवरी को दिल्ली में होने वाली किसान परेड में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से लगभग 25,000 ट्रैक्टर हिस्सा लेंगे। आपको बता दें कि किसान नेताओं ने घोषणा की है कि वे गणतंत्र दिवस के मौके पर ट्रैक्टर यात्रा निकालेंगे और विरोध प्रदर्शन करेंगे। 

kisan andolan: ट्रैक्टर रैली का आज रूट तय करें किसान, UP, उत्तराखंड से इतने हजार ट्रैक्टर लेंगे हिस्सा

सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच अबतक 11 दौर की बैठक हो चुकी है, लेकिन दूर-दूर तक कोई हल नहीं निकल सकता है। सरकार कृषि कानून को डेढ़ साल के लिए स्थगित करने और इसमें संशोधन के लिए तैयार है लेकिन किसानों को कृषि कानूनों की वापसी से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। लिहाजा दोनों तरफ से गतिरोध बना हुआ है।

जानकारी के मुताबिक 26 जनवरी को होने वाली किसानों की ट्रैक्टर रैली को पुलिस ने शनिवार को मंजूरी दे दी है। किसान नेताओं ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा है कि किसान दिल्ली में प्रवेश करेंगे और शांतिपूर्ण तरीके से मार्च करेंगे। परेड का रूट आज फाइनल किया जाएगा। शनिवार को किसान नेताओं और पुलिस के बीच बैठक हुई थी। इस बैठक के बाद स्वराज इंडिया के योगेंद्र यादव ने कहा कि '26 जनवरी को किसान इस देश में पहली बार गणतंत्र दिवस परेड करेगा। पांच दौर की वार्ता के बाद ये सारी बातें कबूल हो गई हैं। सारे बैरिकेड खुलेंगे, हम दिल्ली के अंदर जाएंगे और मार्च करेंगे। रूट के बारे में मोटे तौर पर सहमति बन गई है।

जानकारी के अनुसार उन्होंने आरोप लगाया है कि दोनों प्रदेशों से निकलकर यूपी गेट की ओर बढ़ रही ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को विभिन्न जिलों में पुलिस द्वारा रोका गया है लेकिन किसान हर कीमत पर प्रदर्शन स्थल पर पहुंचेंगे। टिकैत ने एक बयान में कहा है कि करीब 25,000 ट्रैक्टर यहां पहुंचेंगे और गणतंत्र दिवस के मौके पर ट्रैक्टर परेड निकाली जाएगी। 

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राकेश टिकैत बोले कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों के साथ ही अन्य जिलों में भी किसान ट्रैक्टर रैली निकालेंगे। वहीं बीकेयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने रैली की जानकारी देते हुए कहा है कि किसी भी राजनीतिक व्यक्ति को इसमें हिस्सा लेने की अनुमति नहीं होगी। फिलहाल इस मामले में आगे क्या होता है ये तो वक्त ही बताएगा। 

आपको बता दें कि तीन कृषि कानूनों का विरोध करते हुए लाखों की तादाद में किसान देश की राजधानी की सीमाओं पर डटे हुए हैं और इस कानून को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। इस दौरान कई बार 11 बार वार्ताएं भी हुईं थी, मगर ये बेनतीजा रहीं हैं। इतना ही नहीं सर्दी औऱ बारिश के बीच में डटे हुए किसानों को अकाल मौत का भी सामना करना पड़ा है। 

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