सीमा संबंधी मामलों पर हुई चर्चा, जल्दी समाधान बनी सहमति : नेपाली विदेश मंत्री

 


नई दिल्ली। नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप कुमार ग्यावली ने कहा है कि उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ सीमा संबंधी मामलों पर विचार-विमर्श किया है तथा दोनों पक्ष इन मुद्दों को यथाशीघ्र हल करने पर सहमत हैं।

भारत की यात्रा पर आए ग्यावली ने एस. जयशंकर के साथ दोनों देशों के संयुक्त आयोग की छठी बैठक में शुक्रवार को शिरकत की । इससे पहले दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय बैठक की जिसमें दोनों देशों के विदेश सचिव और राजदूत भी उपस्थिति रहे।

बाद में नेपाली विदेश मंत्री ने विश्व मामलों की भारतीय परिषद के एक कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान ग्यावली ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के मार्गनिर्देशन में द्विपक्षीय संपर्क और विश्वास बहाली के लिए काम करने का निश्चय किया गया ताकि सभी मुद्दों को सुलझाया जा सके।

उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच कालापानी और सुसता सीमांकन का काम पूरी तरह नहीं हो पाया है। यह काम वर्ष 2007 में एक तकनीकी समिति को सौंपा गया था। उन्होंने कहा कि सीमा मुद्दे को हल करने के लिए एक कार्यदल और विदेश सचिव स्तर पर तंत्र कायम किया गया है। हालांकि यह काम अधूरा है और इसे प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाना चाहिए।

नेपाल सरकार द्वारा कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख को शामिल करते हुए नेपाल के नए मानचित्र को जारी करने के फैसले का समर्थन करते हुए  ग्यावली ने कहा कि भारत ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद भी नया नक्शा जारी किया था। ऐसा करते समय भारत ने नेपाल के साथ कोई विचार-विमर्श नहीं किया था।

दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट के संबंध में उन्होंने कहा कि उन्हें भारत की ओर से संयुक्त अध्ययन की पेशकश से जुड़ी कोई जानकारी नहीं है। माउंट एवरेस्ट का एक हिस्सा चीन की ओर है इसलिए नेपाल-चीन ने मिलकर इसकी ऊंचाई नापने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन किया। उन्होंने कहा कि यह राजनीतिक नहीं बल्कि वैज्ञानिक कार्य है।

मेहमान विदेश मंत्री ने कहा कि उनका देश संमुद्री पहुंच से दूर है इसलिए वह सड़क और रेल परियोजनाओं और पाइपलाइन परियोजना पर ध्यान दे रहा है। नेपाल अपनी आर्थिक प्रगति के लिए भारत और चीन दोनों से सहायता लेना चाहता है। वह भारत और चीन के साथ अपने संबंधों की तुलना नहीं करता।

ग्यावली ने दोनों देशों के बीच 1950 में हुई संधि को अद्यतन बनाने के लिए काम करने पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि भारतीय सेना में नेपाल के गोरखा लोगों की भर्ती पर किसी प्रकार का पुनर्विचार नहीं किया जा रहा है। 

ग्यावली ने कहा कि नेपाल कोविड-19 वैक्सीन की प्रतीक्षा कर रहा हैं। वहीं भारत वैक्सीन कार्यक्रम शुरु करने वाले कुछ अग्रिम देशों में से है। इससे नेपाल में भी उम्मीद जगी है। इस सफलता के लिए भारत और वैक्सीन निर्माता कंपनियों को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि एक पड़ोसी होने के नाते  हम विश्वास करते हैं कि हमें भी इन टीकों का लाभ मिलेगा।

व्यापारिक संबंधों पर पड़ोसी देश के नेता ने कहा कि भारत नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। हालांकि, द्विपक्षीय व्यापार घाटा एक बड़ी समस्या है। हमारी अर्थव्यवस्था इतने बड़े व्यापार असंतुलन को बनाए नहीं रख सकती है। द्विपक्षीय व्यापार व्यवस्था की समीक्षा की प्रक्रिया में नेपाल ने कुछ उपायों का प्रस्ताव किया है। इससे नेपाल को निर्यात का विस्तार करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि नेपाल इन उपायों के सकारात्मक और आगामी विचार की अपेक्षा करते हैं। नेपाल व्यापार में भारत का प्रतियोगी नहीं है।

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