हिरासत में मौत : संजीव भट्ट की याचिका पर सुनवाई टली

 


नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 1990 के पुलिस हिरासत में मौत के मामले में आरोपित पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट की याचिका पर सुनवाई टाल दी है। संजीव भट्ट की ओर से शुक्रवार को एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड फारुख रशीद ने जिरह के लिए वरिष्ठ वकील के मौजूद न होने के चलते सुनवाई टालने का आग्रह किया था। जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली बेंच ने उनके आग्रह को स्वीकार करते हुए मामले की सुनवाई 27 जनवरी तक टाल दी है। 

भट्ट को गुजरात के जामनगर सेशंस कोर्ट ने नवंबर 1990 में जाम जोधपुर निवासी प्रभुदास वैष्णानी की हिरासत में मौत के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। गुजरात हाईकोर्ट ने उनकी सजा को निलंबित करने के लिए दायर याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ संजीव भट्ट ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। घटना प्रभुदास माधवजी वैष्णानी की मृत्यु से संबंधित है, जो नवंबर 1990 में हिरासत में यातना के कारण हुई। उस समय भट्ट जामनगर में सहायक पुलिस अधीक्षक थे। संजीव भट्ट ने दूसरे अधिकारियों के साथ वैष्णानी समेत 133 लोगों को भारत बंद के दौरान दंगा करने के आरोप में हिरासत में लिया था।

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