आधुनिक भारत के सप्तऋषियों में से एक थे दत्तोपंत ठेंगडी : राम बहादुर राय

 


नागपुर। वरिष्ठ पत्रकार एवं हिन्दुस्थान समाचार के समूह संपादक राम बहादुर राय ने कहा कि प्राचीन भारत के सप्त ऋषियों के तर्ज पर आधुनिक भारत में भी सात ऋषि तुल्य महान व्यक्तित्वों की यदि सूची बनाई जाए तो वह दत्तोपंत ठेगड़ी के बिना पूरी नहीं हो सकती। वरिष्ठ पत्रकार राय; राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट और रामटेक स्थित ताई गोलवलकर कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को आयोजित “भारतीय राजनीति में दत्तोपंत ठेंगड़ी का योगदान” विषयक वेबिनार को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के जन्म को 100 वर्ष होने के बाद भी जब लोग उस व्यक्ति के कार्य और विचारों की चर्चा करते हों तो वह निश्चित तौर पर महापुरुष कहलाने के हकदार हैं। दत्तोपंत ठेंगड़ी की 100वीं जयंती पर जब हम उनके कार्य और विचारो पर मंथन कर रहे हैं तो उनके महापुरुष होने पर कोई संदेह नहीं रह जाता। 

राय ने कहा कि महापुरुषों को किसी संस्था या संगठन की परिधि में या अन्य किसी सीमा में बांधकर नहीं देखा जा सकता। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दो महापुरुष ऐसे हैं जिनका व्यक्तित्व तमाम सीमाओं से परे था। उनमें से एक पंडित दीनदयाल उपाध्याय जिन्होंने एकात्म मानवतावाद का जीवन दर्शन दिया। दूसरे दत्तोपंत ठेंगड़ी जिन्होंने अपना अलग राजनीतिक दर्शन रखा, जिसके चलते उन्हें युगद्रष्टा कहा जाता था। राम बहादुर राय ने कहा कि दत्तोपंत ठेंगड़ी ने केरल से अपने जीवन लक्ष्य की यात्रा प्रारंभ की। ठेंगड़ी सत्य की खोज में केरल गए थे। वहां जाने के बाद उनको यह अहसास हुआ कि उन्हें अपना मार्ग मिल गया है। राय ने कहा कि जीवन में मार्ग का मिलना लक्ष्य की ओर ले जाता है। ठेंगड़ी की जीवन यात्रा दक्षिण भारत से प्रारंभ हुई थी। वहीं प्राचीन काल में शंकराचार्य ने भी हिन्दू धर्म के पुनरुत्थान के लिए दक्षिण भारत से ही यात्रा प्रारंभ की थी। दत्तोपंत की राजनीतिक यात्रा पर राय ने बताया कि महात्मा गांधी ने जनगणना का फार्म भरते हुए अपना व्यवसाय राजनीति लिखवाया था। वह अपने जीवन में 3 बार खुद का पेशा राजनीति बता चुके हैं। इसी अर्थ से दत्तोपंत भी राजनेता थे। दत्तोपंत 2 बार राज्यसभा के लिए चुने गए थे। वहां से मिले अनुभव के आधार पर उन्होंने लोगों का मार्गदर्शन किया। दत्तोपंत अपने जीवन में सत्ता की राजनीति से हमेशा दूर ही रहे। 

आपातकाल के संस्मरण को याद करते हुए राय ने बताया कि आपातकाल के दौरान जयप्रकाश नारायण तथा अन्य नेताओं कि गिरफ्तारी होने के बाद आंदोलन की कमान दत्तोपंत के हाथों में थी। उन्होंने भूमिगत रहकर आपातकाल के खिलाफ आंदोलन चलाया। वहीं इंदिरा गांधी के खिलाफ जनता पार्टी के गठन में ठेंगड़ी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। दत्तोपंत का जयप्रकाश नारायण को लिखा पत्र काफी चर्चित हुआ था। पद्मश्री राय ने कहा कि इस पत्र में ठेंगड़ी ने एस.एम. जोशी का नेतृत्व और जनता पार्टी का गठन इन दो अहम बिंदुओं पर फोकस किया था। नतीजतन आपातकाल के बाद कांग्रेस के विकल्प के रूप में जनता पार्टी की सरकार बनी थी। राय ने कहा कि सरकार बनने के बाद दत्तोपंत सत्ता की राजनीति से दूर अपने कार्य में वापस लौट गए थे। इस वेबिनार में नागपुर विश्वविद्यालय के पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट के प्रमुख डॉ. निर्मलकुमार सिंग, डॉ. कल्पना पांडे, मैनेजमेंट काउंसिल सदस्य समय बन्सोड, विष्णु चांगदे सम्मिलित हुए। 

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