किसानों पर दायर मामले हों वापस, तीनों काले कानून को भी बिना विलम्ब रद्द करे सरकार

 


पंचकूला। हरियाणा किसान कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और राज्य सरकार में चेयरमैन रह चुके विजय बंसल एडवोकेट ने किसान आंदोलन को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि किसानों पर दर्ज किए गए सभी मामले तत्काल प्रभाव से वापस लिए जाएं और तीनों काले कानूनों को रद्द कर किसानों के हित में फैसला लिया जाए।

हालांकि अब केंद्र की भाजपा सरकार की किसान विरोधी नीतियां जग जाहिर हो चुकी हैं और किसानों को विश्व पटल पर विभिन्न देशों का समर्थन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार खेती हड़पने के तीन काले कानूनों को सही बताकर किसानों के साथ षड्यंत्र कर रही है। मोदी सरकार किसानों को 'गुलामी की जंजीरों' में जकड़ने की साजिश कर रही है। साथ ही  किसानों को 'आतंकी' बता एफआईआर दर्ज करवा रही है।

लाठी और अश्रु गैस चलवा किसानों का दमन करने के भाजपा के षड्यंत्र को किसान और कांग्रेस विफल कर देंगे। कांग्रेस नेता ने कहा कि महात्मा गांधी ने कहा था कि, 'जो कानून तुम्हारे अधिकारों की रक्षा न कर सके उसकी अवहेलना करना तुम्हारा परम कर्त्तव्य है। उपाध्यक्ष ने कहा कि तीन खेती विरोधी काले कानूनों ने मोदी सरकार के मुखौटे को उतार दिया है। असल में मोदी सरकार का मूल मंत्र है, 'किसानों का शोषण, पूंजीपतियों का पोषण, किसानों का दमन, पूंजीपतियों को नमन.' विजय बंसल ने कहा कि भाजपा के प्रवक्ता व सांसद तथा हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर किसानों को 'आतंकी' बताते हैं।

उत्तर प्रदेश के एक मंत्री किसानों को 'गुंडा' कहते हैं। पहले भी देश के कृषि मंत्री द्वारा किसान आत्महत्या का कारण 'नपुंसकता' तक संसद के पटल पर बता किसानों का अपमान किया जा चुका है। यही नहीं शांतिप्रिय तरीके से खेती विरोधी काले कानूनों के खिलाफ देश की राजधानी दिल्ली आ रहे किसानों पर 12 हजार एफआईआर भाजपा सरकार द्वारा दर्ज की गई हैं।

 'एमएसपी की समाप्ति का षड्यंत्र'
 विजय बंसल ने कहा कि मोदी सरकार ने अनाज मंडियों को खत्म करने का कानून बनाया है। अगर अनाज मंडियां खत्म हो जाएंगी तो एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर किसान का अनाज खरीदेगा कौन? क्या मोदी सरकार व 'फ़ूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया से फसल खरीदने जाएंगे? यह अपने आप में असंभव है। जब समर्थन मूल्य कोई देगा ही नहीं, जो अनाज मंडी में मिलता था तो फिर एमसपी मिलेगा कैसे, देगा कौन और मिलेगा कहां?  

'जमाखोरों को खुली छूट'
बंसल ने कहा कि इन काले कानूनों में मोदी सरकार ने जमाखोरों को असीमित मात्रा में फ़सलों यानि गेहूं, चावल, दाल इत्यादि की जमाखोरी की छूट दे दी है। किसानों की फसलें आने पर ये जमाखोर सस्ते दाम में फसल खरीद लेंगे और बाद में आम आदमी को महंगे दामों में बेचेंगे। न किसान को कीमत मिलेगी और आम आदमी महंगाई की मार से पिसेगा।

'एक देश, एक बाजार का सफेद झूठ'
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने एक और झूठ परोसा, कहा कि किसान एक राज्य से दूसरे राज्य फ़सल बेच सकता है। देश में 86 प्रतिशत किसानों के पास 5 एकड़ से कम जमीन है। उसमें से भी 80 प्रतिशत किसान ऐसे हैं जिनके पास 2 एकड़ ज़मीन है। वो अपने जिले से बाहर फसल बेचने की क्षमता नहीं रखते तो दूसरे राज्य में कैसे बेचेंगे? साफ है मुट्ठीभर धन्ना सेठ खरीदेंगे और वो अपने मर्जी के दाम पर बेचेंगे।

'पूंजीपतियों के हवाले खेती'
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने कॉरपोरेट कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग का कानून बनाकर फिर जमींदारी की शोषणकारी प्रथा की आग में किसानों को झोंक दिया है। मोदी सरकार जानती है कि 86 प्रतिशत छोटे किसानों की क्षमता ही नहीं होगी पूंजीपतियों से लड़ने की और इस तरह 20 से 25 लाख करोड़ का खेती का व्यापार करोड़ों किसानों से छीनकर मुट्ठी भर पूंजीपतियों को सौंप दिया जाएगा।

'गरीब की राशन प्रणाली पर प्रहार'
उन्होंने कहा, 'जब समर्थन मूल्य पर अनाज खरीदा ही नहीं जाएगा तो सार्वजनिक वितरण प्रणाली में 86 करोड़ लोगों को अनाज कैसे मिलेगा? और अनाज मंडिया खत्म होने पर लाखों मंडियों के कर्मचारी, हम्माल, छोटे आढ़ती, सभी का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा।

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