मांगो को लेकर 22 अगस्त को बैंककर्मियों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल वन्य जीवों के प्रजनन हेतु माकूल है नाहरगढ़ बॉयोलॉजिकल पार्क कानून व्यवस्था को मुद्दा बनाकर कहा, भाजपा सरकार में संगठित तरीके से हो रहा अपराध बार्सिलोना में मौंत बनकर दौड़ी वैन, दो की मौत उदयपुर में बनेगा विश्वस्तरीय बर्ड पार्क, होगा पर्यटन एवं शोध के केन्द्र के रूप में विकसित मलाला को ऑक्‍सफोर्ड विश्वविद्यालय में मिला दाखिला वैज्ञानिकों ने पौधे से बनाया पोलियो वायरस को खत्म करने का टीका प्रधानमंत्री ने नीति आयोग द्वारा अयोजित “चैंपियंस ऑफ़ चेंज” पहल पर युवा उद्यमियों को संबोधित किया राजस्थान डिजिफेस्ट कोटा-2017 शुरू, दिखा आईटी प्रतिभाओं का महाकुम्भ अफस्पा के खिलाफ 16 साल जंग करने वाली ने रचाया विवाह जयपुर में ऑनलाइन होंगे सभी 151 वाहन प्रदूषण जांच केन्द्र सुप्रीम कोर्ट में CBI का जवाब अगले हफ्ते: राजीव गांधी हत्याकांड हिजबुल मुजाहिदीन को अमेरिका ने विदेशी आतंकवादी संगठन किया घोषित, पाकिस्तान है नाराज शरीफ और उसके बेटों के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच होगी, समन भेजा बाइक सवार बदमाशों ने दिन दहाड़े युवती की गोली मारकर हत्या, आरोपी फरार पद्म पुरस्कारों के लिए अब होंगे ऑनलाइन आवेदन, नहीं चलेगी कोई सिफारिश: PM मोदी जब तक किसान खुशहाल नहीं होगा, नये भारत का निर्माण नहीं होगा : राजनाथ सिंह मेरी सहमति के बिना कोरियाई प्रायद्वीप में युद्ध नहीं होगा : मून ममता बनर्जी की अकड़ कायम, TMC ने मारी निकाय चुनावों में बाजी नौजवान के रफ्तार का जुनून और बाइक की इंजन की गड़गड़हाट उसका संगीत
पोंगल के मौके पर जलीकट्टू नहीं होगा, SC ने शनिवार से पहले आदेश देने से किया इंकार
sanjeevnitoday.com | Thursday, January 12, 2017 | 02:50:48 PM
1 of 1

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार से पहले जलीकट्टू पर फैसला देने वाली अर्जी को ठुकरा दिया है। कोर्ट ने कहा कि बेंच को आदेश पास करने के लिए कहना अनुचित है। जलीकट्टू मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के नोटिफिकेशन पर अपना फैसला सुरक्षित रखा हुआ है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई थी कि जलीकट्टू को लेकर अदालत ने जो आदेश सुरक्षित कर रखा है, उस पर शनिवार से पहले आदेश सुना दिया जाए। कोर्ट ने कहा फैसले का ड्रॉफ्ट तैयार हो गया है लेकिन शनिवार से पहले आदेश सुनाना संभव नहीं है। बता दें कि जल्लीकट्टू यानी सांड़ों की दौड़ पर रोक के खिलाफ तमिलनाडू सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था।


दरअसल 22 जनवरी 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने जल्लीकट्टू पर लगाई गई रोक पर पुनर्विचार करने से मना कर दिया था। तमिलनाडु के कुछ निवासियों की तरफ से दायर पुनर्विचार याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में जल्लीकट्टू पर रोक लगाई थी। वहीं केंद्र सरकार ने 8 जनवरी को अधिसूचना जारी कर जल्लीकट्टू पर लगे प्रतिबंध को हटा लिया था। अधिसूचना में कुछ प्रतिबंध भी लगाए गए थे। पशु कल्याण बोर्ड, पीपुल्स फॉर एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स, बेंगलुरू के एक एनजीओ और अन्य ने सुप्रीम कोर्ट में अधिसूचना को चुनौती दी थी। याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अधिसूचना पर रोक लगा दी थी।

 
पिछले साल जुलाई में तमिलनाडू सरकार ने याचिका में परंपरा का हवाला दिया था। इस पर जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा था कि - इस दलील में दम नहीं। 1899 में 10 हज़ार से ज़्यादा बाल विवाह हुए। 12 साल से कम उम्र की लड़कियों की शादी हुई। क्या इसे परंपरा मान कर जारी रहने दिया जा सकता है? हमें सिर्फ ये देखना है कि ये खेल कानून और संविधान की कसौटी पर खरा उतरता है या नहीं।

यह भी पढ़े : हिरण को शेर से लड़ते देख बनाया था ये किला, कभी थी यहां शेरों की गुफाएं... देखे : photos

यह भी पढ़े : मौसा से प्यार कर बैठी भांजी, फिर बनाएं फिजिकल रिलेशन और...

यह भी पढ़े : माँ के बाहर निकलते ही, पिता बंद कमरे में नाबालिग बेटी के साथ करता था यह...

यह भी पढ़े : भगाकर ले आया था जीजा अपने साले की पत्नी, रोड पर छिड़ा खूनी संघर्ष... देखे : photos



FROM AROUND THE WEB

0 comments

Most Read
Latest News
© 2015 sanjeevni today, Jaipur. All Rights Reserved.