कैदियों की बल्ले-बल्ले, कोरोना को दे रहे धन्यवाद

 


उज्जैन। केंद्रीय जेल भैरवगढ़ में बंद कैदियों में से 700 से अधिक कैदियों को कोरोना महामारी के तहत डीजी जेल के निर्देश पर पैरोल पर भेज दिया गया था, लेकिन अब इनके आने का क्रम 24 नवंबर से प्रारंभ हो गया था। करीब 450 कैदी वापस भी लौट आए थे। इन्हे पुन: इनके निवास स्थल भेजने का क्रम जारी है, जो आज पूरा हो जाएगा। इधर दो कैदी तय समयावधी पर वापस नहीं लौटे थे, इनके खिलाफ भैरवगढ़ थाने में प्रकरण दर्ज करवाया गया है। प्रकरण दर्ज होने के बाद एक वृद्ध कैदी महिला जेल आ गई थी। उसने तकनीकी कारण बताया। उसके संबंध में भोपाल से अभिमत मांगा गया है। वहीं जो पुरूष अभी तक नहीं आया, उसके खिलाफ प्रकरण दर्ज होकर कार्रवाई जारी है।

शनिवार को यह जानकारी देते हुए जेल अधीक्षक अलका सोनकर ने बताया कि कोरोना महामारी के बाद शुरू पैरोल के 240 दिन पूरे हो गए थे। डीजी जेल द्वारा दिए गए ताजा आदेश के बाद अब पैरोल अवधि 300 दिन हो जाएगी। 60 दिन बाद पुन: कैदियों का आने का क्रम वही रहेगा जैसा जाने का रहा था। उन्‍होंने बताया कि एक पुरूष कैदी जिसे 24 नवंबर को आना था ओर नहीं आ पाया,उसके संदर्भ में जानकारी निकाली जा रही है। उसी दिन जिस वृद्ध महिला बंदी को आना था,वह नहीं आई तो उसके खिलाफ भी प्रकरण दर्ज करवाया गया था। वह 25 नवंबर को आ गई। उसने नहीं आ पाने का तकनीकी कारण बताया, जोकि न्याय संगत है। चूंकि हम नियम में बंधे हे, ऐसे में हमने भोपाल से मार्गदर्शन मांगा है। वहां से जैसे निर्देश होंगे, कार्रवाई होगी। फिलहाल इस महिला बंदी को भोपाल से मार्गदर्शन आने तक जेल में ही रखा जाएगा।

श्रीमती सोनकर का कहना है कि कैदियों की मुलाकात को लेकर अभी कोई निर्देश नहीं है। इसलिए मुलाकात का क्रम प्रोटोकाल के साथ फिलहाल जारी है। ताकि कोरोनाकाल के पहले दौर में कैदी अपने परिजनों से नहीं मिल पाए थे वे मिल लें। इससे वे तनाव और अवसाद में नहीं जाते हैं।

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