'रैली, धरना, प्रदर्शन और बलात्कार, देख आज की बानगी भरे पड़े अखबार'

 


हिसार। बज्मे-ए-अदब साहित्यिक संस्था की मासिक काव्य गोष्ठी रविवार को टाऊन पार्क में उपन्यासकार रमेश दूहन की अध्यक्षता में आयोजित की गई। काव्य गोष्ठी में मंच संचालन जयभगवान लाडवाल ने किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में वीरेंद्र कौशल उपस्थित रहे। 

काव्य गोष्ठी में जयभगवान लाडवाल ने सुनाया कि रैली, धरना, प्रदर्शन और बलात्कार, देख आज की बानगी भरे पड़े अखबार। ऋषि सक्सेना ने सुनाया कि आग बहती है यहां गंगा में, वहां झेलम में, कोई तो बताए, कहां जाकर नहाया जाए। दीपक कुमार ने कुछ यूं सुनाया कि चांद पे पानी टोहने आलो, मन्नै नेता जी की टोह लेणी सै, क्या टोह दोगे मेरे बोस नेे, बोलो क्या कुछ रिश्वत लेनी सै। कलमकार वीरेंद्र कौशल ने सुनाया कि तीन रंग का कपड़ा नहीं अपना तिरंगा, तीन मूल्यों की अमूल्य खान है अपना तिरंगा। रमेश दूहन ने सुनाया कि आज के दिन मुझे सुभाष की याद आई वो मॉं का लाल जिसने अपनी जान गंवाई। राजेंद्र अग्रवाल ने सुनाया कि नेताजी के जतन से हमने आजाद हिंद को पाया—सुभाष जी को शत-शत नमन हमारा। काव्य गोष्ठी में हरदीप सिंह, बेगराज, चिराग, महेंद्र सिंह व राहुल आदि ने भी काव्य पाठ किया।

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