लोगों का दिल जीतने में कामयाब रही फिल्म 'मास्साब' 29 जनवरी को देशभर में होगी रिलीज

 


बांदा। जनपद बांदा के ग्रामीण परिवेश में फिल्माई गई फिल्म "मास्साब" देश-विदेश के फिल्म महोत्सव में ढेरों पुरस्कारों के साथ-साथ लोगों का दिल जीतने में कामयाब रही है। अब यह फिल्म 29 जनवरी को देशभर में रिलीज होगी। फिल्म के नायक बांदा के ही रहने वाले हैं। उल्लेखनीय है कि एक एक्टर और एक निर्देशक के तौर पर ढेरों अवॉर्ड जीत चुके आदित्य ओम ने फिल्म "मास्साब" का निर्देशन किया है। 

'मास्साब' ने अमेरिका में औरलैंडो के फ्लोरिडा में आयोजित कॉस्मिक फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट ड्रामा फिल्म का खिताब जीता है। इस फिल्म को राजस्थान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट फिल्म (क्रिटिक च्वाइस), बेस्टर एक्टर (शिवा सूर्यवंशी), स्पेशल एप्रिसिएशन अवॉर्ड (आदित्य ओम) से भी सम्मानित किया गया था। इनके अलावा रांची में आयोजित झारखंड अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह में इसे बेस्ट इंस्पीरेशनल फिल्म‌ के खिताब से भी नवाजा गया था। इसे नासिक में आयोजित दादा साहेब फाल्के‌ नासिक इंटरनेशनल ‌फिल्म महोत्सव में बेस्ट फिल्म का पुरस्कार प्राप्त हुआ था जबकि अहमदाबाद इंटरनेशनल चिल्ड्रेन फिल्म फेस्टिवल में इसे सर्वश्रेष्ठ फिल्म‌ का पुरस्कार मिला था। फिल्म‌‌ ने जमशेदपुर में सर्वश्रेष्ठ फिल्म, सर्वश्रेष्ठ एक्टर (शिवा सूर्यवंशी) और बेस्ट मेक-अप का खिताब प्राप्त किया था। 

इंदौर में आयोजित इंटरनेशल फिल्म फेस्टिवल ऑफ एमपी में फिल्म को बेस्ट चिल्ड्रेन फिल्म, बेस्ट एक्टर (शिवा सूर्यावंशी) और मोस्ट प्रॊमिसिंग यंग डायरेक्टर (आदित्य ओम) जैसे पुरस्कार मिले थे। मुम्बई में आयोजित कला समृद्धि इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में फिल्म‌ को बेस्ट डायरेक्टर (आदित्य ओम), बेस्ट स्टोरी (शिवा सूर्यवंशी) जैसे खिताब हासिल हुए थे। इस फिल्म का आधिकारिक रूप से कोलकाता इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल, जागरण फिल्म फेस्टिवल, कोलकाता‌ इंटरनेशनल चिल्ड्रेन फिल्म फेस्टिवल, थर्ड आई एशियन फिल्म फेस्टिवल, सिंधुदुर्ग इंटरनेशनल फिल्म‌ फेस्टिवल, हेबिटाट फिल्म फेस्टिवल और गुवाहाटी फिल्म फेस्टिवल के लिए भी चयन हो चुका है।

पुरुषोत्तम स्टूडियोज के बैनर तले बनी मास्साब  फिल्म का आदित्य ओम ने न‌ सिर्फ‌ निर्देशन किया है, बल्कि उन्होंने इस फिल्म का स्क्रीनप्ले और संवाद भी लिखे हैं जबकि इस फिल्म‌ की कहानी, अतिरिक्त स्क्रीनप्ले व संवाद शिवा सूर्यवंशी ने लिखे हैं। आलोक जैन इस फिल्म के क्रिएटिव प्रोड्यूसर हैं, आशीष‌ कुमार एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर हैं और श्रीकांत असाती ने इस फिल्म का छायांकन किया है। प्रकाश झा ने इस फिल्म का संपादन, वीरल-लावण ने इस फिल्म का पार्श्व संगीत दिया है जबकि महावीर प्रजापति ने इस फिल्म को लोक संगीत से सजाया है। इस फिल्म से अपने कैरियर की शुरुआत करने जा रहे शिवा सूर्यवंशी "मास्साब"  में मुख्य नायक के तौर पर नजर आएंगे हैं फिल्म की मुख्य नायिका शीतल सिंह हैं फिल्म‌ के बाकी कलाकारों में कृतिका  सिंह और चंद्रभूषण‌ सिंह प्रमुख भूमिका में नजर आएंगे। 

बांदा में फिल्म की शूटिंग
जनपद में प्राथमिक विद्यालय खुरहण्ड, महुआ, तथागत ज्ञानस्थली स्कूल अतर्रा, प्रेम सिंह की बगिया बड़ोखर और कालिंजर के दुर्ग में फिल्म की शूटिंग की गई है। फिल्म के नायक और कथाकार शिवा सूर्यवंशी जनता इंटर कॉलेज खुरहण्ड में प्रिंसिपल रहे लाल बहादुर सिंह के पुत्र हैं। इनके बड़े भाई भी वर्तमान में शिक्षक हैं। शिवा की यह पहली हिंदी फीचर फिल्म है। इसके पहले वह कई फिल्मों में भी काम कर चुके हैं।

फिल्मों के अतिरिक्त उन्होंने कई नाटक भी लिखे हैं और अभिनय भी किया है। फिल्म की नायिका का रोल करने वाली शीतल सिंह ने अमेरिका से अभिनय की पढ़ाई की है और कई सीरियल तथा फिल्मों में अभिनय किया है। फिल्म में कई स्थानीय लोगों को भी अभिनय का मौका दिया गया है। इनमें प्रगतिशील किसान प्रेम सिंह ने नायिका के पिता का अभिनय किया है।

"मास्साब"  की अनूठी कहानी 
गौरतलब है कि, "मास्साब" की अनूठी कहानी भारत के ग्रामीण इलाकों में प्राथमिक शिक्षा की पृष्ठभूमि को आधार बनाकर गढ़ी गयी है। फिल्म के नायक आशीष कुमार को बच्चों को पढ़ाने-लिखाने का जुनून  है। अपने इस सपने को पूरा करने की खातिर वो अपनी आईएएस की सरकारी नौकरी को भी त्याग देते हैं। उसे एक बेहद पिछड़े हुए ग्रामीण इलाके में पढ़ाने का मौका मिलता है जहां उसका सामना दकियानूसी रिवाजों व अंधविश्वासों को मानने वालों, उपेक्षा और करप्शन का शिकार‌ लोगों से होता है। 
बाद में अपनी मेहनत, लगन और समर्पण से वो गांव के प्राथमिक स्कूल का हालत इस कदर बदल देते हैं कि बाद में वो स्कूल श्रेष्ठ निजी स्कूलों को टक्कर देने में सक्षम हो जाता है। मगर गांव में उसके सकारात्मक बदलाव लाने के प्रयासों से नाराज लोग उसके खिलाफ एक बड़ा षड़यंत्र रचते हैं। ऐसे में आशीष‌ कुमार इन नयी चुनौतियों का कैसे करता है और कैसे इन विषम हालात में भी स्कूली बच्चों को शिक्षा देने का कार्य जारी रखता है, इसका खुलासा रोमांचक अंदाज में फिल्मायें गये क्लाइमेक्स के दौरान होता है।

आदित्य ओम ने "मास्साब" के बारे में बात करते हुए कहा, यह सत्य घटनाओं पर आधारित है। हमने इस फिल्म को एक सिनेमाई अंदाज में कुछ इस तरह से शूट किया है कि आपको यह फिल्म सत्यता और प्रामाणिकता का आभास कराएगी।

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