रिलायंस और फ्यूचर रिटेल की डील को सेबी की हरी झंडी

 


नई दिल्ली। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने रिलायंस ग्रुप और फ्यूचर रिटेल के बीच हुई डील को मंजूरी दे दी है। इस सौदे के तहत रिलायंस रिटेल अब फ्यूचर ग्रुप की फ्यूचर रिटेल का अधिग्रहण करेगी। बाम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) ने बुधवार को कहा कि सेबी की टिप्पणी को देखने से पता चलता है इसका लिस्टिंग या डिलिस्टिंग की कवायद पर कोई विपरीत 'ऑब्जर्वेशन' नहीं है, इसलिए कंपनी नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्लूनल (एनसीएलटी) को अपनी स्कीम सौंप सकती है। इस डील के तहत फ्यूचर ग्रुप की थोक और खुदरा इकाई पूरी तरह रिलायंस रिटेल वेंचर्स (आरआरवीएल) की पूर्ण स्वामित्व वाली इकाई रिलायंस रिटेल एंड फैशन लाइफस्टाइल (आरआरएफएलएल) को ट्रांसफर की जाएगी। लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग कारोबार सीधे आरआरवीएल को सौंपा जाएगा।

बीएसई ने अपने ऑब्जर्वेशन लेटर में कहा, "अमेजन की शिकायतें, फ्यूचर रिटेल के जवाब और अमेजन की दलीलों के साथ दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित और पूरी हो चुकी पूरी कार्रवाई की जानकारी सूचीबद्ध इकाइयों के शेयरधारकों के संज्ञान में लानी होगी।" साथ ही सिंगापुर इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर की भी पूरी जानकारी शेयरधारकों को दी जानी चाहिए। इन सभी मामलों पर शेयरधारकों से मंजूरी लेनी होगी। साथ ही एनसीएलटी को भी योजना की मंजूरी की पूरी जानकारी देनी होगी। 

उल्लेखनीय है कि अगस्त में रिलायंस इंडस्ट्रीज की सहयोगी कंपनी रिलायंस रिटेल वेंचर्स ने फ्यूचर ग्रुप का रिटेल कारोबारी 25,000 करोड़ रुपये में खरीदने का फैसला किया था। इस पर अमेजन ने आपत्ति दर्ज कराई थी। अमेजन के पास फ्यूचर ग्रुप की इकाई फ्यूचर कूपन प्रा. लि. की 49 फीसदी हिस्सेदारी है। अमेजन ने सेबी से आठ बार कहा था कि वह इस डील को एनओसी न दे। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) पहले ही इस डील को स्वीकृति दे चुका है। सेबी की मंजूरी के बाद अब फ्यूचर ग्रुप को एनसीएलटी, कर्जदारों और अल्पसंख्यक शेयरधारकों से मंजूरी लेनी होगी।

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