28 जनवरी को पूरे राज्य में सभी चीनी मिलों के गेट पर होगा धरना प्रदर्शन

 


पटना। भाकपा-माले के सिकटा विधायक व बिहार राज्य गन्ना उत्पादक किसान महासभा के राज्य संयोजक बीरेन्द्र प्रसाद गुप्ता ने बिहार राज्य गन्ना उत्पादक किसान महासभा के नेताओं ने शनिवार को कहा कि वर्तमान सत्र में गन्ना का मूल्य 400 रुपये प्रति क्विंटल तय करने, सभी प्रकार के बकाए का भुगतान, रीगा चीनी मिल को पेराई सत्र अविलंब आरंभ करने, घटतौली पर रोक और गन्ना किसानों के अन्य सवालों पर 28 जनवरी को पूरे राज्य में चीनी मिलों पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। शनिवार को संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि सूबे में विगत ढाई महीने से चीनी मिलें चालू हैं, लेकिन अब तक सत्र 2020-21 के लिए गन्ना मूल्य का निर्धारण नहीं हो सका है। इस बीच डीजल, खाद, कीटनाशक जैसी वस्तुओं और जरूरी कृषि उपकरणों के मूल्य लगातार बढ़ते गए हैं। गन्ना से पैदा होने वाली वस्तुओं चीनी, इथेनॉल समेत अन्य वस्तुओं के दाम भी बढ़ गए हैं, लेकिन किसानों के लिए गन्ना का मूल्य अभी तक निर्धारित नहीं हो सकना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। हमारी मांग है कि गन्ना का न्यूनतम मूल्य 400 रुपये प्रति क्विंटल तय किया जाए।

राज्य के सीतामढ़ी जिले में रीगा चीनी मिल का पेराई सत्र अब तक शुरू नहीं हो पाया है। मिल बंद पड़ा है. आज राज्य में मात्र 11 चीनी मिलें बची हैं। रीगा चीनी मिल के बंद हो जाने के बाद यह संख्या घटकर 10 रह जाएगी। इसके कारण वहां के करीब 40 हजार ईख काश्तकार और करीब 700 मिल कामगार के सामने रोजी-रोटी की समस्या खड़ी हो गई है। काश्तकारों के खेतों में करीब 15 लाख क्विंटल गन्ना खड़ा है, जिसकी कीमत 50 करोड़ के आसपास बताई जा रही है, ये सब बर्बाद हो रहे हैं। किसानों का 60 से 70 करोड़ रुपये का बकाया पड़ा हुआ है। केसीसी के मार्फत दिए गए ईख मूल्य पर बैंकों की दावेदारी भी 60 करोड़ के आसपास बताई जा रही है। मिल मजदूरों का ढाई करोड़ रुपये का बकाया भी प्रबंधन के पास है। स्थिति बेहद गंभीर हो चली है, लेकिन मिल अभी तक चालू नहीं हुआ है। 

उन्होंने कहा कि 2017 में बिहार के पश्चिम चंपारण और उत्तर बिहार के अन्य क्षेत्रों में प्रलंयकारी बाढ़ से गन्ना की फसल भी काफी बर्बाद हुई थी। बर्बाद गन्ना फसल के मुआवजे के लिए सरकार द्वारा राशि भी आवंटित की गई, लेकिन किसानों को मुआवजा आज तक नहीं मिला है। इस संदर्भ में उच्च न्यायालय से गन्ना किसानों को फसल का मुआवजा देने का फैसला आया, लेकिन इसे आज तक लागू नहीं किया गया है। इस मौके पर उनके साथ अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष केडी यादव और बिहार राज्य सह सचिव उमेश सिंह भी उपस्थित थे।

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